January 26, 2020
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67 साल की उम्र में पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का निधन, ऐसा रहा प्रखर वक्ता और कुशल नेता का राजनीतिक सफर

  • by Yogesh
  • August 7, 2019

भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का दिल का दौरा पड़ने से 67 साल की उम्र में मंगलवार रात करीब सवा 11 बजे निधन हो गया, सुषमा स्वराज को दिल का दौरा पड़ने के बाद एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

सुषमा स्वराज लंबे अर्से से बीमार चल रही थीं और बीमारी की वजह से ही उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा, सुषमा स्वराज को दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त है।

बीजेपी की कद्दावर नेता और एक मुखर वक्ता के अलावा सुषमा स्वराज का राजनीतिक जीवन शानदार रहा था।

14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला कैंट में जन्मीं सुषमा स्वराज ने अंबाला कैंट के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत और राजनीतिक विज्ञान की शिक्षा हासिल की, जिसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की, और हरियाणा के लैंग्वेज डिपार्टमेंट द्वारा आयोजित राजकीय प्रतियोगिता में उन्होंने लगातार तीन बार बेस्ट हिंदी स्पीकर का अवॉर्ड अपने नाम किया।

साल 1970 में सुषमा स्वराज ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से अपने राजनीतिक करियर शुरूआत की उनके पति स्वराज कौशल सोशलिस्ट लीडर जॉर्ज फर्नांडिस से जुड़े हुए थे और सुषमा स्वराज साल 1975 में फर्नांडिस की लीगल डिफेंस टीम का हिस्सा बन गईं, इससे पहले 1973 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील प्रैक्टिस शुरू की थी।

आपातकाल के बाद वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर सुषमा स्वराज महज 25 वर्ष की उम्र में जुलाई 1977 में देवी लाल की अगुवाई में जनता पार्टी सरकार में विधानसभा की सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बनीं, इसके बाद वे 1987 से 1990 तक हरियाणा की शिक्षा मंत्री भी रहीं, तथा 27 साल की उम्र में सुषमा स्वराज को जनता पार्टी (हरियाणा) का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया।

सुषमा स्वराज ने अप्रैल 1990 को राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा, उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया गया, इसके बाद 1996 में वह दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र से सांसद चुनी गईं, उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया, और अक्टूबर 1998 में उन्होंने केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। लेकिन बीजेपी विधानसभा चुनाव हार गई और सुषमा स्वराज ने दोबारा राष्ट्रीय राजनीति में वापसी की।

सितंबर 1999 में बीजेपी ने सुषमा स्वराज को तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कर्नाटक के बेल्लारी सीट से उतारा गया था। जहां महज 12 दिन के चुनाव प्रचार में उन्हें 358000 वोट मिले। लेकिन वे सोनिया गांधी से महज 7 प्रतिशत वोटों से हार गईं।

इसके बाद नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सुषमा स्वराज को विदेश मंत्री बनाया गया, अपने राजनीतिक करियर में सुषमा स्वराज 7 बार सांसद और तीन बार विधायक रहीं थीं।

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