June 18, 2018
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सफ़रनामा 2017: कुछ बड़े ‘राजनीतिक बदलावों’ का गवाह बना यह वर्ष

  • by Ashutosh
  • December 27, 2017

साल 2017 अब अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, लेकिन यह साल कुछ ऐसे राजनीतिक बदलावों का गवाह रहा, जिसका असर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आने वाले समय में साफ़ तौर पर दिखाई पड़ेगा। यह साल ख़ुद में कुछ ऐसी राजनीतिक विरासतों को समेटे हुआ है, जिनकों आगामी समय में भी देश राजनीतिक लिहाज़ से नज़रंदाज़ नहीं कर सकेगा।

आईये आपको लिए चलते हैं इस साल के एक ऐसे ‘राजनीतिक सफ़रनामें’ जहाँ हम देखेंगें इस साल के कुछ अहम राजनीतिक उतार चढ़ाव..

मोदीमय हुआ देश,

Credit: AFP

इस बात में कोई दोहराय नहीं है कि नवंबर, 2016 में लागू किए गए नोटेबंदी के फ़ैसले के बाद, ऐसा माना जा रहा था कि 2017 में होने वाले कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। लेकिन साफ़ तौर पर चीज़ें इसके विपरीत ही दिखाई पड़ीं। दरसल, साल की शुरुआत से ही केन्द्रशासित भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की जीत के सिलसिले का आगाज़ हो गया था और शुरू में हुए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को ऐतिहासिक जीत प्राप्त हुई।

यह सिलसला यहीं नहीं थमा तथा गोवा और मणिपुर में भी बीजेपी एक बड़े दल के रूप में उभरते हुए, अपनी सरकार बनाने में सफ़ल रही। साथ ही हल ही में हुए हिमाचल और गुजरात के चुनावों में भी पार्टी ने जीत का स्वाद चखा, हालाँकि गुजरात में पार्टी कुछ संघर्ष करती जरुर नज़र आई, लेकिन अंततः मोदी फैक्टर यहाँ भी विफ़ल साबित नहीं हो सका। बीजेपी में इन जीतों का पूरा श्रेय मोदी और अमित शाह की जोड़ी को दिया गया और पिछले वर्षों की तरह ही इस बार भी देश में मोदी नाम की गूंज कम होती दिखाई नहीं पड़ी।

इस प्रकार से अभी के आँकड़ों के मुताबिक भारत के कुल 30 राज्यों में से 18 पर बीजेपी (या समर्थित) का शासन में है और वहीँ कांग्रेस मात्र पंजाब, कर्नाटक, मिज़ोरम, पुद्दुचेर्री एवं मेघालय तक ही सिमट गई है।

कांग्रेस में राहुल युग की शुरुआत,

Credit: PTI

कांग्रेस के लिए साल की शुरुआत काफ़ी बुरी रही और पार्टी उत्तराखंड, गोवा तथा मणिपुर में अपनी सरकार बचा पाने में विफ़ल रही। हालाँकि पंजाब की जीत से पार्टी को थोड़ा मनोबल जरुर प्राप्त हुआ।

इसके बावजूद, कांग्रेस के लिए यह साल किसी लिहाज़ से सफ़ल तो नहीं कहा जा सकता है, लेकिन साल के अंत में कांग्रेस में एक अहम और प्रत्याशित बदलाव जरुर देखने को मिला, जिसके तहत कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गाँधी को कांग्रेस की कमान थमाते हुए उन्हें अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालाँकि इस बात की अटकलें काफ़ी समय से लगाई जा रही थी, लेकिन लंबें समय से कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं सोनिया गाँधी ने साल के अंत में ठीक गुजरात चुनावों के पहले यह निर्णय लिया।

कहीं न कहीं नवनिर्वाचित कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी और पार्टी के लिए एक चीज़ जरुर थोड़ी राहत देने वाली रही और वह थी गुजरात चुनावों में बीजेपी को दी कड़ी टक्कर देना। पार्टी भले ही गुजरात चुनाव हार गई हो, लेकिन इन चुनावों के नतीजों में बीजेपी के समर्थन में आई कमी, कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए थोड़ी राहत देने वाली चीज़ साबित हुई।

दुश्मन फ़िर बने दोस्त,

पिछले लोकसभा चुनावों में बीजेपी से नाता तोड़ देने वाले नीतीश कुमार इस साल एक बार फ़िर बीजेपी और मोदी का दामन थामते नज़र आए। कथित तौर पर नीतीश कुमार ने यह क़दम आरजेडी के सुप्रीमो लालू यादव की धूमिल होती छवि के कारण उठाया, लेकिन इस बात से इंकार करना भी बेईमानी होगी कि नीतीश के इस क़दम के पीछे कई अन्य राजनीतिक मायने भी रहे।

इस बीच बीजेपी और नीतीश का यह मिलन, ख़ुद नीतीश के करीबियों को रास नहीं आया और पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद यादव और अली अनवर ने खुल कर इसका विरोध किया, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित करते हुए उनकी संसद सदस्यता छीन ली गई।

संवैधानिक पदों पर भी बीजेपी का परचम,

इस साल अहम संवैधानिक पद भी कांग्रेस मुक्त होते नज़र आए। जहाँ राष्ट्रपति चुनावों में बीजेपी समर्थित उम्मीदवार राम नाथ कोविंद ने जीत प्राप्त की, वहीँ उप राष्ट्रपति के तौर पर वेंकैया नायडू चुने गए।

 

इस बीच देश इस साल भी मिले जुले रूप से मोदी के रंग में रंगा दिखा और मोदी सरकार एक सफ़ल सरकार की छवि स्थापित करने में आंशिक तौर पर कामयाब होती नज़र आई। सरकार के कई फ़ैसलों जैसे जीएसटी इत्यादि पर जहाँ विपक्ष ने सरकार की जमकर आलोचना की वहीँ रोजगार में कमी और बढ़ती मंहगाई भी सरकार के लिए सरदर्द बनी रही | 

लेकिन अब यह देखना ख़ास होगा की आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव अब खुले तौर पर मोदी बनाम राहुल होंगें और मोदी को कड़ी टक्कर देने के लिए राहुल को अपनी ही पार्टी में फ़िलहाल कुछ कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है और साथ ही उन्हें राज्य स्तर पर भी पार्टी को मजबूत करने की आवश्यता होगी।

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1 Comment

  1. very very nice news good website

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