January 18, 2018
  • facebook
  • twitter
  • linkedin
  • instagram
  • Homepage
  • >
  • हिंदी
  • >
  • AIIMS के डॉक्टरों ने प्रधानमंत्री से कहा, “एक दिन हमारी जिंदगी जीकर देखिए!”

AIIMS के डॉक्टरों ने प्रधानमंत्री से कहा, “एक दिन हमारी जिंदगी जीकर देखिए!”

  • by Ashutosh
  • December 24, 2017

समाज में डॉक्टरों को हमेशा से ही सराहनीय और विश्वसनीय नज़र से देखा जाता रहा है | लेकिन आज के समय डॉक्टर और मरीज़ दोनों पक्षों में एक दूसरे के प्रति एक असंतुष्टि का भाव बढ़ता जा रहा है | हमारे पास कई ऐसे उदहारण भी हैं, जहाँ कई डॉक्टरों ने इस पवित्र माने जाने वाले पेशे को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, वहीँ कुछ ऐसे भी उदाहरण भी उपलब्ध हैं, जहाँ मरीज़ों के रिश्तेदारों ने डॉक्टरों से अत्यधिक बदसलूकी भी की है |

लेकिन कुछ घटनाओं के चलते हम किसी भी पेशे के अमूल्य योगदान को न तो नज़रंदाज़ कर सकतें हैं और न ही उनका अपमान | इस बीच इन्हीं कुछ घटनाओं और कम वेतन से आहत राजस्थान के डॉक्टरों ने कुछ दिनों से सरकार के खिलाफ़ प्रदर्शन शुरू किया है |

और अब उच्च वेतन और पदोन्नति की मांग को लेकर राजस्थान में  प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों को एम्स के डॉक्टरों का भी समर्थन मिलतें दिखाई दे रहा है | दरसल, एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने डॉक्टरों की ज़िन्दगी से जुड़े तनाव समझने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को एक दिन के लिए डॉक्टरों की ज़िन्दगी जीने का आग्रह किया है | यह कहानी बेशक ही मशहूर फ़िल्म ‘नायक’ से मिलती जुलती जरुर लग सकती है | लेकिन देखना यह है कि क्या अब प्रधानमंत्री मोदी भी फ़िल्म में अनिल कपूर के किरदार की तरह यह चुनौती स्वीकार करतें हैं या नहीं? 😉  

हम आपको बता दें की आज एम्स रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरएडी) ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर मुख्यतः सरकारी अस्पतालों में खराब बुनियादी ढांचे और अनुकूल हालातों में मरीज के रिश्तेदारों द्वारा दुर्व्यवहार की वजह से डॉक्टरों पर जबर्दस्त दबाव को समझने का आग्रह किया है |

आज एम्स रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हरजीत सिंह भट्टी ने पत्र में इन बातों को रेखांकित करते हुए लिखा,

‘‘हम भाग्यशाली हैं कि हमारे पास आप जैसा सक्रिय प्रधानमंत्री है… हम आपसे अनुरोध करतें हैं कि आप एक दिन के लिए सफेद एप्रेन पहनें और सरकारी डॉक्टर की तरह वह एक दिन बिताएं, ताकि आप हम पर पड़ने वाले जबर्दस्त दबाव, इलाज नहीं मिलने से मरीजों के गुस्से और संसाधन तथा बुनियादी ढांचे की कमी की वजह से दम तोड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था को समझ सकें ’’

‘‘ डॉक्टर के तौर पर आपका एक दिन स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगा क्योंकि यह चिकित्सा पेशे में विश्वास बहाल करने में काफ़ी मददगार होगा ’’

कहाँ से शुरू हुआ विवाद?  

इस विवाद का सिलसला मुख्यतः राजस्थान सरकार द्वारा आवश्यक सेवाएं रखरखाव अधिनियम (आरईएसएमए) को तीन महीने के लिए लागू कर राज्य के कई डॉक्टरों को गिरफ्तार करने के कारण शुरू हुआ | राजस्थान सरकार ने आरईएसएमए लागू कर 86 डॉक्टरों को गिरफ्तार किया | जिसके बाद से ‘राजस्थान इन सर्विस डॉक्टर असोसिएशन’ ने उन डॉक्टरों की मांगों के समर्थन में बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी |

हम आपको बता दें कि राजस्थान के डॉक्टर 16 दिसंबर से हड़ताल पर हैं | इस हड़ताल को डॉक्टरों की इच्छा नहीं बल्कि मजबूरी के तौर पर पेश किया जा रहा है |

पत्र में राजस्थान सरकार के खिलाफ़ वायदाखिलाफ़ी का आरोप

इस पत्र में राजस्थान सरकार के परिपेक्ष में बात करते हुए, सरकार पर वायदाखिलाफ़ी का आरोप लगाया गया और पत्र में कहा गया,

‘‘ डॉक्टरों की मांगों को पहले राजस्थान सरकार ने मान लिया था लेकिन वे उन्हें पूरा करने से अब इनकार कर रहे हैं, जिससे मेहनतकश डॉक्टरों में अश्विास और गुस्सा है, कृपया राजस्थान सरकार को अपना वायदा पूरा करने का निर्देश दिया जाए और डॉक्टरों पर हो रहे जुल्म को रोका जाए ’’

पत्र में दिखा मंत्रियों के प्रति भी गुस्सा 

इस पत्र में डॉक्टरों ने सरकार के मंत्रियों पर भी निशाना साधते हुए, मंत्रियों के प्रति नाराज़गी जताई | इस पत्र में साफ़ तौर पर कहा गया कि मोदी जी का यह कदम उन मंत्रियों के लिए भी एक मिसाल पेश करेगा जो डॉक्टरों पर लगातार घटिया आरोप लगाते हुए, इस पेशे को बदनाम कर रहें हैं |

अब देखना यह है ‘नायक’ फ़िल्म की तर्ज़ पर शुरू हुई इस कहानी का जवाब मोदी जी किस अंदाज़ में देते हैं | खैर ! देखना यह भी दिलचस्प होगा की आज कल समाज में इस पेशे पर लगातार उठ रहें सवालों का जवाब कब और कैसे दिया जाएगा, ताकि लोगों का विश्वास डॉक्टरों के प्रति कायम रहे, और वह भी इस पेशे को पर्याप्त इज्ज़त दें |

Previous «
Next »

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *