July 20, 2018
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2017 में इन बॉलीवुड हस्तियों ने कहा दुनिया को ‘अलविदा’

  • by Ashutosh
  • December 23, 2017

हर साल की तरह जहाँ इस साल भी बॉलीवुड को कई नए और प्रतिभाशाली कलाकार मिले, वहीँ फ़िल्म जगत ने इस साल कई ऐसे बड़े सितारों को ख़ोया, जिनकी जगह बॉलीवुड में शायद ही कोई ले सके |

आज हम आपको भारतीय फ़िल्म जगत से जुड़े ऐसे ही कुछ नामों से रूबरू करवाने जा रहें हैं, जो भले ही अब हमारे बीच न हों, लेकिन फ़िल्म जगत में उनका अमूल्य योगदान हमेशा उनकी याद दिलाता रहेगा |

विनोद खन्ना

फ़िल्मों के दीवानों के बीच इनका नाम दशकों तक छाया रहा है | इनकी मृत्यु इस साल 24 जुलाई को कैंसर के कारण हुई | उन्होंने काफ़ी लम्बें समय तक इस बीमारी से संघर्ष किया | लेकिन अंततः 70 वर्षीय विनोद खन्ना को इस बीमारी ने हरा दिया और फ़िल्म जगत को अपना एक अमोल सितारा खोना पड़ा | विनोद खन्ना हमेशा ही अपनी फ़िल्मों के जरिये हम सबके दिलों में जिंदा रहेंगें, उनकी प्रमुख फ़िल्मों में ‘अमर अकबर अंथोनी’, ‘चाँदनी’, ‘इंसाफ’ और ‘मुक़द्दर का सिकंदर’ जैसे कई नाम शुमार हैं |

ओम पुरी

इस नाम को सुनते ही एक्टिंग की असीम प्रतिभा का एक प्रतिबिंब सामने आता है | ओम पुरी को हमेशा से ही अलग-अलग तरह के किरदार निभाने के लिए जाना जाता था | इन किरदारों को अपनी प्रतिभा के दम पर जिंदा करने में वह अत्यंत माहिर थे | इनकी मृत्यु 6 जनवरी को दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुई | हालाँकि बाद में मृत्यु की कारण पर संदेह भी जताया गया, लेकिन इसके कोई भी साक्ष्य सामने नहीं आ सके | ओम पूरी को ‘आक्रोश’ और ‘आरोहन’ जैसे टीवी सीरियल में अपने किरदार की वजह से हमेशा याद किया जाता रहेगा, वहीँ ‘जाने भी दो यारों’, ‘हेराफ़ेरी’ ‘गाँधी’ और ‘चाची 420’ जैसी उनकी फ़िल्में भी उन्हें हमारे बीच हमेशा अमर रखेंगी |

रीमा लागू,

बॉलीवुड में माँ के किरदार में अपनी छाप छोड़ने वाली रीमा जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता है | उन्होंने जहाँ टीवी सीरियल ‘तू तू मैं मैं’ के जरिये लोगों का अत्यधिक मनोरंजन किया, वहीँ ‘मैंने प्यार किया’, ‘हम साथ साथ हैं’ और ‘कुछ कुछ होता है’ जैसी न जाने कितनी फ़िल्में हैं, जहाँ उनके क़िरदार को भुलाया ही नहीं जा सकता | इस महान अभिनेत्री ने इस साल 10 मई को दिल की बीमारी के चलते हमें अलविदा कहा |

लेख टंडन

आप भले ही इस नाम से ज्यादा परिचित न हों, लेकिन इनका चेहरा देखते ही इनके क़िरदार तुरंत ही आँखों के सामने आ जाते हैं | इन्होनें जहाँ ‘आम्रपाली’ जैसी तमाम शानदार फ़िल्मों का निर्देशन किया, वहीँ वह ‘रंग दे बसंती’ और ‘स्वदेश’ जैसी कई फ़िल्मों में पात्र को जीवित कर देने वाला अभिनय किया | 88 वर्षीय टंडन जी ने इस साल कुछ बिमारियों के चलते 15 अक्टूबर को आख़िरी साँसें लीं |

सीताराम पंचाल

सीताराम ने फ़िल्म जगत को अदाकारी के नए मायने दिए, उन्होनें हमेशा से ही मुश्किल से मुश्किल पात्र को इतनी सहजता और खूबसूरती से निभाया कि मानों वह कोई क़िरदार नहीं, बल्कि अपनी ही कहानी बयाँ कर रहें हों | दरसल, उनकी कहानी मिएँ भी संघर्ष की कमी नहीं है, उन्हें अंतिम क्षणों तक पैसों की दिक्कत का सामना करना पड़ा | वह किडनी में हुए कैंसर से संघर्ष कर रहें थे, तथा उन्होंने अपने प्रशंसकों से भी आर्थिक मदद की गुहार की और लोग मदद को आगे भी आए, लेकिन काफ़ी वक़्त के संघर्ष के बाद उन्होंने इस साल 10 अगस्त को हमें अलविदा कह दिया | ‘जॉली एलएलबी 2’, ‘पीपली लाइव’, ‘बैंडिट क्वीन’ और ‘द लीजेंड ऑफ़ भगत सिंह’ में उनके क़िरदार की खूबसूरती को ये दुनिया कभी नज़रंदाज़ नहीं कर सकती |

इंदर कुमार

फ़िल्म जगत में इंदर कुमार एक जाना-माना चेहरा थे | इंदर कुमार जहाँ नामी टीवी सीरियल, ‘क्यूंकि सास भी कभी बहु थी’ में एक अहम भूमिका में नज़र आए थे, वहीँ ‘वांटेड’, ‘कहीं प्यार न हो जाए’ और ‘तुमको न भूल पायेंगें’ जैसी फ़िल्मों में भी उन्होनें अपने पात्र को खूबसूरती से निभाते हुए दर्शकों का ख़ूब दिल जीता | हालाँकि अपने अंतिम क्षणों में वह यौन उत्पीड़न जैसे विवादों से घिरे रहे, जिसके चलते वह काफ़ी अकेले हो गये थे, और इस साल 28 जुलाई को महज़ 44 वर्ष की उम्र में दिल के दौरे के कारण उनकी मृत्यु को गई |

शशि कपूर

शशि कपूर के बारे में कुछ भी कहना मानों सूरज को दिया दिखाने वाली बात ही प्रतीत होगी | हालहीं में ही 4 दिसंबर को उन्होनें अपनी आख़िरी साँसें ली और इस दुनिया को अलविदा कहा | उन्होंने करीब 145 फ़िल्मों में काम किया, जिनके एक एक किरदार की प्रशंसा करते कोई थक नहीं सकता | दीवार फ़िल्म का उनका एक डायलाग “मेरे पास माँ है” मानों आज तक सबकी जुबान पर देखने को मिलता है | शशि कपूर ने विदेशी अदाकारा, जेनिफर केंडल से 1958 में शादी रचाई थी |

नीरज वोहरा

दुर्भाग्यपूर्ण रूप से इस सूची में हाल ही में एक और नाम जुड़ गया है, जो हैं नीरज वोहरा | 14 दिसंबर को कैंसर के कारण नीरज वोहरा ने इस दुनिया को अलविदा कहा | बॉलीवुड में इनका योगदान मात्र अदाकारी तक ही नहीं सिमटा, इन्होनें ‘हेराफ़ेरी 2’ जैसी फ़िल्म का निर्देशन भी किया | साथ ही उन्हें ‘मन’ और ‘खिलाड़ी 420’ जैसी फ़िल्मों में अपनी एक अलग छाप छोड़ी |

इस साल फ़िल्म जगत से जुडें कई नाम हमारे लिए सिर्फ यादें और मात्र नाम बन गयें हैं, लेकिन इनके द्वारा निभाए गये तमाम क़िरदार हमें इन सभी नामों को कभी भूलने नहीं देंगें और आने वाले कलाकरों के लिए यह सभी प्रतिभा के लिहाज़ से हमेशा प्रेरणा का श्रोत रहेंगें |

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