May 24, 2018
  • facebook
  • twitter
  • linkedin
  • instagram

दिल्ली पुलिस कॉन्स्टेबल ने HC से कहा, “हम 7 दिन, 24 घंटे ड्यूटी को बाध्य हैं, हमें एक दिन की छुट्टी क्यूँ नहीं?”

  • by Ashutosh
  • January 31, 2018

बीते कुछ सालों से जब भी देश में पुलिस की ढीली-ढाली कार्यप्रणाली की बात की जाती है, तो एक बिंदु पुलिस के जवानों की ड्यूटी में सख्ती का भी सामने आता है। कहा जाता है ऐसी सख्त ड्यूटी में उन्हें अपने ही लिए वक़्त नहीं जाता, जिसकी वजह से उनकी मनोस्थिति में इसका ग़लत पप्रभाव पड़ता है और जो उनकी कार्यप्रणाली पर भी गंभीर असर डालता है।

खैर! इस विषय पर चर्चा का आयाम काफ़ी विस्तारित है, इसको महज़ कुछ बिंदुओं तक समेटा नहीं जा सकता। लेकिन उपरोक्त तथ्य को भी नाकारा नहीं जा सकता है, और इस पर अब खुल के ख़ुद पुलिस भी सामने आने लगी है। इसी का एक उदाहरण सामने आया है दिल्ली के हाईकोर्ट में, जहाँ दिल्ली पुलिस के एक जवान की इसके संबंध में 2015 में हाईकोर्ट में दायर की गई एक याचिका पर हाल ही में सुनवाई की गई और आगे के निर्देश दिए गए।

दरसल, दिल्ली हाईकोर्ट में पुलिसकर्मियों के 24 घंटे ड्यूटी करने के नियम को चुनौती दी गई है। कोर्ट में दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल बाबूलाल ने एक पिटीशन दायर, जिसमें दिल्ली पुलिस एक्ट के सेक्शन 24 का हवाला देते हुए कहा गया,

“ दिल्ली पुलिस एक्ट के सेक्शन 24 के अनुसार जरूरत पड़ने पर पुलिसकर्मी को हफ्ते के सातों दिन और 24 घंटे के लिए ड्यूटी पर मौजूद होना होगा और वह इसके लिए बाध्य है ”

और दिल्ली पुलिस के इसी निमय के खिलाफ़ याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका दायर की |

इस पर हैरानी जताते हुए सुनवाई कर रहे जस्टिस जीएस सिस्तानी और जस्टिस एसडी सहगल ने याचिकाकर्ता से पूछा,

“ क्या पुलिसवाले सोते नहीं हैं, क्या वह खाना नहीं खाते, क्या उन्हें ब्रेक नहीं दिया जाता? ”

जस्टिस सिस्तानी के इस सवाल पर याचिकाकर्ता बाबूलाल ने कहा,

“ हां, ये सब तो करते हैं, लेकिन नियम तो यही है कि पुलिसकर्मी हफ्ते के 7 दिन, 24 घंटे ड्यूटी के लिए मौजूद रहेगा ”

इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले पर गृह मंत्रालय से जवाब मांगातें हुए, अगली सुनवाई 5 अप्रैल को करने का आदेश दिया।

दिल्ली पुलिस आजादी से पहले के पुलिस एक्ट को कर रही है फॉलो

इस मामले में याचिकाकर्ता बाबूलाल का दावा है कि वर्तमान में भी दिल्ली पुलिस आजादी से पहले के पुलिस एक्ट को फॉलो कर रही है, जो सीधे तौर पर जीवन के अधिकार (मूल अधिकार) का उल्लंघन है। साथ ही नौकरी के दौरान लंबे ड्यूटी ऑवर और कम छुटि्टयों से परेशान होकर ही उन्होंने यह याचिका दायर करने का फ़ैसला किया, जिसमें उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि पुलिस रिफॉर्म के लिए कई कमेटियां बनी, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट भी सौंपी, लेकिन पुलिस प्रणाली में कुछ भी बदलाव नहीं किए गये।

कुछ यूँ चली मामले की सुनवाई,

दिल्ली पुलिस के वकील: “ऐसा बिल्कुल नहीं है कि पुलिसकर्मियों को छुट्टी नहीं दी जाती है, सिर्फ थानाध्यक्ष को ही घर जाने से पहले अपने डीसीपी को बताना होता है”
जस्टिस सिस्तानी (बाबूलाल से): “पुलिस की नौकरी 24 घंटे की तो नहीं है, फिर आप कैसे कह रहे हैं कि 24 घंटे काम करते हैं? क्या बीच में सोने-खाने का भी समय नहीं मिलता”
बाबूलाल: “जरूरत पड़ने पर कभी भी ड्यूटी के लिए बुला लिया जाता है, कम से कम एक दिन की छुट्टी तो मिलनी चाहिए”
गृह मंत्रालय का वकील: “हमें जवाब दायर करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया जाए”
जस्टिस सिस्तानी: “आपको किस आधार पर समय दिया जाए? पुलिसकर्मी तो अब भी ड्यूटी पर हैं, आप 5 अप्रैल तक अपना पक्ष रखें”

हालाकिं एक लिहाज़ से देखा जाए तो यह विषय काफ़ी संज़ीदा दिखाई पड़ता है, लेकिन इस विषय पर हम आपकी भी राय जानना चाहेंगे, आख़िर आप क्या सोचना है, नीचे कमेंट बॉक्स पर अपनी राय अवश्य ही साझा करें |

Previous «
Next »

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *