June 18, 2018
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बड़ा कदम: दिल्ली सरकार ने रद्द किया ‘मैक्स हॉस्पिटल’ का लाइसेंस

  • by Ashutosh
  • December 9, 2017

एक वक़्त पहले  हॉस्पिटलों को समाज में किसी मंदिर से कम नहीं देखा जाता था । लेकिन तेज़ी से बढ़ते व्यवसायीकरण की चपेट में अब हॉस्पिटल भी आ चुकें हैं । आय के साथ-साथ मुख्यतः सेवाभाव के नज़रिए से देखें जाने वाला यह पेशा आज मात्र आय के परिपेक्ष में ही सिमट कर रह गया है ।

बहुत से हॉस्पिटलों में बढ़ती लापरवाही, साफ़ तौर पर इनकी गंभीरता और सेवाभाव में आई कमी का परिचय देती है । ऐसा ही एक प्रकरण अब हालही में दिल्ली के शालीमार बाग स्थित मैक्स हॉस्पिटल में देखने को मिला, जहाँ हॉस्पिटल ने एक जिंदा बच्चे को ही मृत घोषित कर दिया ।

इस मामले की जानकारी होने पर दिल्ली सरकार ने इसके जाँच के आदेश दिए और अब दिल्ली सरकार ने इस मामले में जांच रिपोर्ट आने के बाद एक कड़ा फैसला लेते हुए, मैक्स हॉस्पिटल (शालीमार) का लाइसेंस रद्द कर दिया है ।

क्या है पूरा मामला?

दरसल मैक्स हॉस्पिटल ने एक जिंदा नवजात को मृत बताकर उसको प्लास्टिक बैग में उसके माता-पिता को सौंप दिया था, हालाँकि दाह संस्कार के लिए ले जाते वक़्त बच्चे के शरीर ने हिलना-डुलना शुरू कर दिया, और इसके बाद माता पिता ने उसे पीतमपुरा के एक अस्पताल में भर्ती करवाया, जहाँ उसकी मृत्यु हो गई । इसके बाद बच्चे के अभिभावकों ने मैक्स हॉस्पिटल की इस लापरवाही के चलते, हॉस्पिटल के खिलाफ़ कठोर क़दम उठाए जाने की माँग की ।

मैक्स अस्पताल के पक्ष में खड़ा था दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन

इस पूरे प्रकरण में दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन मैक्स अस्पताल और डॉक्टरों के पक्ष में खड़ा दिखाई दिया था । दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने अपने बयान में कहा था,

“ समय से पहले होने वाली ऐसी डिलीवरी के लिए कोई प्रोटोकॉल या गाइडलाइंस तय नहीं हैं, भारतीय कानून 20 हफ़्ते तक गर्भपात की इजाज़त देता है और वहीँ गंभीर मामलों में 24 हफ़्ते में गर्भपात की इजाज़त अदालतों ने दी हैं, अर्थात् भारतीय कानून भी 24 हफ्ते तक के भ्रूण को ज़िंदा ना बचने लायक मानता है ”

मामले की जाँच कर रही डॉक्टरों की टीम ने पाया हॉस्पिटल को दोषी 

इस मामले को लेकर जाँच कर रही डॉक्टरों की 3 सदस्यीय टीम ने 5 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को सौंपी । इस रिपोर्ट में साफ़ तौर पर बताया गया कि मैक्स हॉस्पिटल ने पूर्व निर्धारित नियमों को पालन नहीं किया । डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित करने से पहले ECG ट्रेसिंग नहीं की थी ।

मैक्स अस्पताल ने फ़ैसले को बताया कठोर और अनुचित

वहीँ इन सब के बीच जिंदा बच्चे को मृत घोषित करने वाले मैक्स अस्पताल ने अपने लाइसेंस के रद्द होने पर आपत्ति जताते हुए दिल्ली सरकार के इस फ़ैसले को कठोर और अनुचित बताया है और साथ ही अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ऐसे फैसले से मात्र मरीजों के इलाज के अवसर ही सीमित होंगे ।

खैर! इस बीच यह आज कल अस्पतालों की बढ़ती लापरवाही का एकलौता उदाहरण नहीं है । इन सब के चलते आलम यह है कि आज मरीज़ अस्पतालों की मनमानी फीस चुकाने के बाद भी वहां सुरक्षित महसूस नहीं कर पाते ।

बात सिर्फ़ लापरवाही की नहीं, दरसल एक बड़ा सवाल यह है कि आख़िर आजकल क्यूँ ऐसी लापरवाही अस्पतालों में आम हो गई है, कहीं इसकी वजह आजकल सिर्फ पैसों को अहमियत देने वाले कुछ अस्पताल और डॉक्टर तो नहीं?

यह प्रश्न गंभीर और स्तभ कर देने वाला है, और इस विषय में सिर्फ़ डॉक्टरों को ही नहीं बल्कि हम सभी को यह सोचने की जरूरत है, कि क्या वास्तव में आज का समाज इंसानियत के प्रति इतना संवेदनहीन हो गया है?            

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