July 20, 2018
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देश के इतिहास में पहली बार ‘सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों’ ने ‘चीफ जस्टिस’ पर लगाए गंभीर आरोप

  • by Ashutosh
  • January 12, 2018

आज का दिन देश के इतिहास में अवश्य ही दर्ज़ होगा, आज पहली बार ऐसा हुआ है जब सुप्रीम कोर्ट के कुछ वरिष्ठ न्यायधीश मीडिया के सामने आए और उन्होंने मुख्य न्यायधीश पर गंभीर आरोप लगाए |

दरसल आज सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायधीशों, जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने एक प्रेस कांफ्रेंस की और चीफ जस्टिस की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए, उनपर काफ़ी गंभीर आरोप लगाए |

आज मुख्य न्यायाधीश के बाद दूसरे सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस चेलामेश्वर के घर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई, जिसमें उनके साथ सुप्रीम कोर्ट के तीन और वरिष्ठ न्यायधीश भी शामिल हुए और मीडिया को संबोधित करते हुए जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा,

“हम नहीं चाहते कि 20 साल बाद कोई कहे कि चारों वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने अपनी आत्मा बेच दी थी, इसलिए हमने मीडिया से बात करने का फैसला किया है, भारत समेत किसी भी देश में लोकतंत्र को बरकरार रखने के लिए यह जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था सही ढंग से काम करे और आजकल सुप्रीम कोर्ट का प्राशासनिक कार्य ठीक से नहीं हो रहा है, हालाँकि हमनें इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी”

देश के इतिहास में पहली बार ऐसे मीडिया के सामने आए सुप्रीम कोर्ट के जज

देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब देश की शीर्ष अदालत के जज मीडिया के सामने आकर संस्था के कामकाज़ को लेकर ऐसे सवाल उठाते दिखे | यदि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जजों को ऐसे मीडिया के सामने आकर सवाल उठाने को मजबूर होना पड़े, तब ख़ुद ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि कहीं न कहीं इस देश की सबसे विश्वसनीय संस्था के कामकाज़ में कुछ गड़बड़ी अवश्य हो रही है |

जस्टिस गोगोई ने कहा,

“जब कोई विकल्प नहीं बचा, तब हम आपके सामने आये और हम चाहते हैं की हमारे द्वारा उठाए गए मुद्दें पर कार्यवाई हो”

इस प्रेस कांफ्रेंस में चीफ़ जस्टिस को की गई इस प्रकरण संबंधी लिखित शिकायत को भी सार्वजनिक किया गया |

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर मामलों के आवंटन में अनियमितता बरतने का आरोप

प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एम बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा द्वारा मामलों के आवंटन पर गंभीर प्रश्न उठाए गए |

जजों के अनुसार चीफ़ जस्टिस मनमाने ढंग से कई बड़े मामलों को अपनी पसंदीदा बेचों को आवंटित करते हैं और कई बार वरिष्ठ जजों की अनदेखी करते हुए, कई प्रमुख मामले, जिनसे सुप्रीम कोर्ट की अखंडता जुड़ी होती है, उसे वरिष्ठ जजों के होने के बावजूद जूनियर जजों की बेंच को सौंप दिया जाता है और इसकी शिकायत करने पर कोई उचित कारण भी नहीं बताया जाता | 

अप्रत्यक्ष रूप से चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर ख़ुद को बचाने का आरोप

दरसल कुछ समय पहले चीफ़ जस्टिस ने मेडिकल कॉलेजों की मान्यता संबंधी एक मुद्दे को, जिस पर 5 वरिष्ठ जजों की बेंच को सुनवाई करनी थी, उसे बिना कोई उचित कारण बताए, 3 जूनियर जजों की बेंच को स्थानांतरित कर दिया | यह मुद्दा इसलिए भी अहम था क्यूंकि इसमें अप्रत्यक्ष रूप से ख़ुद चीफ़ जस्टिस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और इसी कारण ऐसा माना गया कि ख़ुद को बचाने के लिए चीफ़ जस्टिस ने यह फ़ैसला लिया, जिससे अन्य वरिष्ठ जज आहत दिखे | 

जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा लोकतंत्र को है ख़तरा, चीफ़ जस्टिस करें अन्य जजों का भी सम्मान

जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, 

“हमनें कुछ कामों को सही तरीके से करने के लिए कहा था, जिसको लेकर कुछ महीने पहले हम चारों जजों ने चीफ जस्टिस को एक चिट्ठी लिखी थी, लेकिन हमारी कोशिशें नाकामयाब रहीं और जब कोई विकल्‍प नहीं बचा तो हम आपके सामने आए हैं, देश का लोकतंत्र खतरे में है, हम देश का कर्ज अदा कर रहे हैं और हम चाहते हैं कि हमारे द्वारा उठाए गए मामले में कार्रवाई हो”  

चारों जजों ने मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट की प्रशासनिक कार्यवाई में जजों के बीच के संवाद की कमी को उजागर किया और एक ढंग से चीफ़ जस्टिस पर मनमाने तौर से काम करने का आरोप लगाते हुए, वरिष्ठ जजों की अनदेखी की बात सामने रखी |

प्रशांत भूषण ने कहा, सरकार के इशारे पर चीफ़ जस्टिस कर रहें हैं काम

इस मामले पर वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने मीडिया चैनल से बातचीत करते हुए कहा,

“मैं पिछले 35 साल से सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई को देख रहा हूँ, लेकिन ऐसी स्थिति कभी नहीं पनपी, कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई जज यह तय करे कि कौन सा जज कौन सा केस देखेगा, पर आज सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश यह तय कर रहे हैं कि कौन सा जज, कौन सा केस करे”

“यह काम सरकार के इशारे पर किया जा रहा है, जिससे कोर्ट की स्वतंत्रता खत्म हो रही है”

“चीफ़ जस्टिस अहम केसों को खास जजों के यहां लगा कर उन्हें डिसमिस करवा देते हैं और जब इस तरह के कामों पर चार वरिष्ठ जजों ने ऐतराज जताया तो उनकी अनदेखी की गई, इसलिए इन चार सीनियर जजों को यह कदम उठाना पड़ा जिससे की पूरा देश जागे”

चीफ़ जस्टिस पर महाभियोग पर जजों ने कहा, राष्ट्र करे फ़ैसला

प्रेस कांफ्रेंस में जब मीडिया द्वारा चीफ़ जस्टिस पर महाभियोग लगाने संबंधी प्रश्न पूछा गया, तो इस पर वरिष्ठ जजों ने कहा,

“इस पर फ़ैसला राष्ट्र को करना है, हमें शीर्ष अदालत के कामकाज़ में जो कमी दिखी हमनें उससे दूर करने का प्रयास किया, लेकिन हमारी अनदेखी की गई और ऐसी स्थिति देश के हित में नहीं हो सकती”

इस बीच ऐसा लगता है कि देश की सर्वोच्च न्याय संस्था अब ख़ुद आंतरिक कलह की शिकार हो गई है, और इन वरिष्ठ जजों ने देश के मुख्य न्यायधीश पर जैसे गंभीर आरोप और सवाल उठाए हैं, उन्हें अनदेखा तो बिल्कुल नहीं किया जा सकता और न ही इन्हें सिरे से खारिच किया जा सकता है |

इस बीच, खबरे यह भी हैं कि इस प्रेस कांफ्रेंस के बाद प्रधानमंत्री के साथ केन्द्रीय कानून मंत्री ने एक बैठक की है | अब देखना यह होगा की आगे इस प्रकरण में क्या कदम उठाए जाते हैं, ताकि देश की सर्वोच्च अदालत की प्रतिष्ठा और अखंडता बरक़रार रहे |

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