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गुजरात विधानसभा चुनाव: सियासी समीकरणों को मिला एक नया मोड़

  • by Ashutosh
  • November 25, 2017

भारत में यूँ तो कहीं न कहीं, किसी न किसी स्तर पर चुनावों का माहौल बना ही रहता है, लेकिन मजाल है कि किसी भी स्तर के चुनाव का रंग फ़ीका नज़र आए । नेताओं के बयानों से लेकर, मीडिया के मसाले तक, सब इन चुनावों में तड़के का काम करते हैं ।

और जब माहौल गुजरात विधानसभा चुनावों का हो, तो क्या कहने । नेताओं से लेकर मीडिया चैनल सब अपनी कमर कस लेते हैं । मोदी जी का गढ़ कहें जाने वाले गुजरात में इस बार भी सियासत की विसात काफ़ी दिलचस्प नज़र आ रहीं है । वर्तमान में गुजरात सहित, केंद्र तथा अन्य कई राज्यों में शासन कर रहीं बीजेपी, इस बार गुजरात चुनावों में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए काफ़ी संघर्ष करती नज़र आ रही है ।

हालाँकि कांग्रेस सहित अन्य विपक्षीय पार्टियों के लिए भी हमेशा की तरह यह राह आसान नहीं है ।  लेकिन इस बार गुजरात की सियासत में उभरे कुछ युवा किरदारों ने इन चुनावों को एक नया ही रंग दे दिया है ।

गुजरात में वर्तमान में शासन कर रही बीजेपी जहाँ अपनी नीतियों को लेकर जानता और कारोबारियों के बीच सफ़ाई देती दिखाई पड़ रही है, वहीँ विपक्ष अपनी एकजुटता को लेकर ही असमंजस में नज़र आ रहा है ।

इन सब के बीच इस बार चुनाव में कुछ नए चेहरों के साथ देशव्यापी मुद्दों ने भी काफ़ी गहमागहमी बना रखी है ।

हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश की तिकड़ी ने बिगाड़े बीजेपी के समीकरण    

अपने-अपने सामाजिक आंदोलनों से उठे इन चेहरों ने इस बार गुजरात चुनावों के समीकरण बदल कर रख दियें हैं । इन तीनों ने जहाँ बीजेपी के लिए इन चुनावों में मुश्किलों के नए द्वार खोल दियें हैं, वहीँ हार्दिक ने कांग्रेस को भी असमंजस में डाल रखा है । यह चेहरे इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्यूंकि ये अपने-अपने समुदायों से जुड़े आर्थिक मुद्दों को आधार बना कर मैदान में उतरे हैं और जिसके चलते इनको भारी समर्थन भी मिलता नज़र आ रहा है ।

एक बार फ़िर नज़र आने लगी कांग्रेस

इन चुनावों की ख़ास बात यह भी है कि इन चुनावों के सहारे कुछ दिनों से शांत सी पड़ी कांग्रेस एक बार फ़िर से देशपटल में एक मुख्य विपक्ष की भूमिका निभाते नज़र आने लगी है । चुनाव भले ही एक राज्य का हो, लेकिन कांग्रेस इसको देशव्यापी रूप से भुनाने में लगी हुई है । दरसल कांग्रेस कहीं न कहीं ऐसा मानती है कि यदि मोदी को उनके ही गढ़ में शिकस्त दे दी जाए, तो कहीं न कहीं उनकी बढ़ती छवि को रोक पाने में कांग्रेस कुछ हद तक सफ़ल हो पाएगी ।

मोदी सरकार के फ़ैसलों की एक बड़ी परीक्षा

इन चुनावों को विपक्ष के साथ-साथ स्वयं बीजेपी भी मोदी सरकार के फ़ैसलों के इंतहान के रूप में लेगी । मोदी सरकार द्वारा लिए गए कई बड़े आर्थिक फ़ैसलों जैसे जीएसटी और नोटबंदी के लिए यह चुनाव कहीं न कहीं एक उचित जवाब साबित होगा । दरसल गुजरात हमेशा से ही कारोबारी व व्यापारियों का गढ़ माना जाता है, और यह वर्ग इन फ़ैसलों से मुख्यतः प्रभावित और आक्रोशित नज़र आया है । इसलिए माना यह जा रहा है कि कहीं न कहीं विपक्ष इन बातों का फ़ायदा उठाने और इस वर्ग को रिझाने की कोशिशें कर रहा है । फ़िलहाल यह तो नतीजे ही बतायेंगें की कौन कितना किस वर्ग को रिझा पाता है ।

बेटे को टिकट न दिए जाने से नाराज़ बीजेपी के पूर्व सांसद ने छोड़ी पार्टी

गुजरात बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद कांजी भाई पटेल और उनके बेटे सुनील पटेल ने बीजेपी का दामन छोड़ दिया है । ख़बरों के मुताबिक कांजी भाई पटेल टिकट बंटवारे से नाराज दिखाई पड़े, क्यूंकि उनके पुत्र को पार्टी ने टिकट देने से माना कर दिया था ।

टिकट बँटवारे से नाराज़ भाजपा विधायक भी छोड़ सकतें हैं पार्टी का दामन

दरसल, टिकट न दिए जाने से नाराज़ भाजपा विधायक, शामजी चौहान ने पार्टी छोड़ने की धमकी दी है | फ़िलहाल चौहान साहब चोटिला विधानसभा सीट से विधायक हैं ।

आरक्षण का वादा कर, पटेलों को ‘ठग’ रही है कांग्रेस

गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रभारी अरुण जेटली ने एक बयान में कहा कि विकास का विरोध करने वाली कांग्रेस अब सामाजिक विभाजन पैदा कर चुनाव लड़ने की रणनीति बना रही है, लेकिन वह कभी अपने इरादे में सफ़ल नहीं हो पाएगी ।

चुनावी रंग में रंगा ट्विटर

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