January 17, 2018
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सुप्रीम कोर्ट की उत्तर प्रदेश सरकार को फ़टकार, क्या आधार कार्ड न रखने वाले बेघर सरकार के लिये अस्तित्व में नहीं?

  • by Ashutosh
  • January 11, 2018

बीते कुछ समय में देश की सर्वोच्च अदालत जनहित की दृष्टि से अनेकों फ़ैसले लेने के साथ ही, सरकारों के सामने कई गंभीर प्रश्नों को भी उठा कर उनसे इन पर जवाब माँगती नज़र आई है।

भले ही सुप्रीम कोर्ट का यह कदम जनहित से जुड़े अनेकों मुद्दों पर सरकारों की विफ़ल कार्यप्रणाली को दर्शता हो, लेकिन माननीय अदालत के इस हस्तक्षेप को भी लोकतंत्र की एक खूबसूरती ही कहा जाना चाहिए।

जब जनता के द्वारा चुनी सरकारें कुछ मसलों में कोताही बरतती नज़र आने लगती हैं, तब ऐसे में देश की शीर्ष अदालत अपने कर्तव्य और दायरों का पालन करते हुए यह साबित देती है कि लोकतंत्र में आज भी जनता सर्वोपरि है, और उसकी अनदेखी या उसकी बातों को अनसुना नहीं किया जा सकता है।

ऐसा ही एक मसला कल बुधवार को सामने आया, जब सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने देश में शहरी बेघरों को बसेरे उपलब्ध कराने हेतु दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से यह जानकारी मांगी कि शहरी बेघरों के आधार कार्ड बनाए जाने के लिए कैसे प्रावधान किए जा रहें हैं ? 

राज्य सरकार का जवाब

इस मामले में राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से पीठ ने  सवाल किया,

” यदि कोई व्यक्ति बेघर है तो आधार कार्ड में उसे कैसे वर्णित किया जाता है? “

दरसल इस सवाल के जरिये पीठ ने यह जानना चाहा कि क्या आधार कार्ड नहीं रखने वाले बेघर लोग भारत सरकार या उत्तर प्रदेश सरकार के लिए अस्तित्व में ही नहीं हैं और क्या इन्हें बसेरों में जगह नहीं मिलेगी?

हालाँकि इस पर मेहता ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि

” यह कहना उचित नहीं है कि जिनके पास आधार कार्ड नहीं है, उनका अस्तित्व ही नहीं है, क्योंकि ऐसी स्थिति में भी उनके पास मतदाता पहचान-पत्र जैसे दूसरे पहचान पत्र हैं, जिनमें उनका पता निहित होता है “

” हम एक मानवीय समस्या से जूझ रहे हैं, साथ ही आधार के लिए स्थाई पता दिया जा सकता है, शहरी बेघर आने-जाने वाली आबादी में आते हैं, और राज्य सरकार इस स्थिति को लेकर सजग है और हम ऐसे सभी व्यक्तियों के लिए बसेरों में जगह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहें  हैं “

हालाँकि इस पर पीठ ने पुनः सवाल उठाया कि फ़िर क्यूँ सरकार कहती है कि 90 प्रतिशत आबादी को आधार कार्ड दिया जा चुका है?

सुप्रीम कोर्ट की आलोचना पर पीठ ने लगाई सरकार को फ़टकार 

इसके साथ ही पीठ ने सुप्रीम कोर्ट पर की गई इस आलोचना पर भी नाराजगी व्यक्त की, जिसमें कहा गया था की कोर्ट सरकार चलाने का प्रयास कर रहा है।

इस पर पीठ ने तल्ख रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को आड़े हाथ लिया और कहा,

” ऐसा लगता है आपका तंत्र विफल हो गया है, आप अपना काम नहीं करते हैं और जब हम कुछ कहते हैं तो देश में सभी यह कहकर हमारी आलोचना करते हैं कि हम सरकार और देश चलाने का प्रयास कर रहे हैं “

इस बीच पीठ ने यह भी याद दिलाया कि ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन योजना‘ 2014 से चल रही है, लेकिन यूपी सरकार ने इसको लेकर अभी तक लगभग कुछ नहीं किया है। हालाँकि कल पीठ ने दो सप्ताह के भीतर आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है और साथ ही मामले की सुनवाई 8 फरवरी के लिए स्थगित कर दी है।

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