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आख़िर 3 साल बाद क्यूँ उठ रहें हैं ‘जस्टिस लोया की मौत’ पर सवाल

  • by Ashutosh
  • November 26, 2017

आज कल सोशल मीडिया में सीबीआई की विशेष अदालत के प्रभारी जज रहे, बृजगोपाल लोया की मौत पर संदेहास्पद रूप से सवाल उठाये जा रहें हैं । यह मामला मुख्यतः इसलिए इतनी गंभीरता से देखा जा रहा है क्यूंकि अपनी मौत से पहले जस्टिस लोया चर्चित सोहराबुद्दीन शेख़ एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें मुख्‍य अभियु्क्त भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान अध्‍यक्ष अमित शाह थे । हम आपको बता दें कि जस्टिस लोया की मौत एक दिसंबर 2014 को मीडिया को बताई ख़बरों के अनुसार दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुई थी ।

यह ख़बर आगामी गुजरात चुनावों को देखतें हुई और भी गंभीर मानी जा रही है । हालाँकि जहाँ एक तरफ़ मृत्यु के तीन साल बाद यह सवाल उठाया जाना थोड़ा अज़ीब नज़र आता है । वहीँ जस्टिस लोया के परिजनों ने एक पत्रिका को दिए गए बयान में जिन-जिन बातों का ख़ुलासा किया, उससे कहीं न कहीं संदेह की स्थिति भी पनपती नज़र आती है ।

तीन साल बाद परिजनों ने किए कुछ ख़ास ख़ुलासे

दरअसल, जस्टिस लोया के रिश्तेदारों के द्वारा एक पत्रिका में दिए गए बयान के आधार पर यह बताया गया कि, मृत्यु के कुछ दिनों पहले ही जस्टिस लोया को एक व्यक्ति विशेष के अनुकूल फ़ैसला सुनाने की एवज में करोड़ों की रिश्वत देने की पेशकश की गई थी । पत्रिका के मुताबिक लोया की बहन और उनके पिता ने इस बात की पुष्टि की ।

जस्टिस लोया के बाद निर्वाचित किए गये जज ने महज़ 3 दिन में की थी सुनवाई पूरी   

जस्टिस लोया की मृत्यु के बाद, एमबी गोसावी को इस केस के संबंध में जज नियुक किया गया था । ख़बरों के मुताबिक जस्टिस गोसावी ने 15 दिसंबर 2014 को सुनवाई शुरू की और 17 दिसंबर को सुनवाई पूरी कर, आदेश सुरक्षित रख लिया ।

इसके बाद 30 दिसंबर 2014 को जस्टिस गोसावी ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि सीबीआई ने आरोपी को राजनीतिक मंशा के चलते फंसाया है और इसके बाद उन्‍होंने अमित शाह को केस से बरी कर दिया था ।

इन आरोपों में कितनी सच्चाई है और कितना झूठ यह तो फ़िलहाल प्रमाणित नहीं है, लेकिन अब इस मुद्दों को लेकर अपने अपने रूप में राजनीतिक खेल का प्रारंभ हो चुका है ।

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