May 24, 2018
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‘फ्रीलांसिंग’: एक बेहतर कल का विकल्प

  • by Ashutosh
  • January 27, 2018

आज के इस दौर में पूरा विश्व एक आर्थिक असंतुलन से जूझ रहा है | मंदी के दौर से गुजर रहे दुनियाभर के देशों, ख़ास कर भारत में बेरोजगारों की एक बड़ी भीड़ तैयार हो रही है और ऐसी हालत में देश के विकास के सूरज पर काले बादल छाना भी लाजमी  है |

इस बात को इस तरह से भी देखा जा सकता है कि बढ़ती बेरोजगारी के साथ हमारे देश के आर्थिक ढाँचे का भी नाश हो रहा है | हालात काफ़ी गंभीर हैं, लेकिन सुधार की गुंजाइश आज भी बरक़रार है |

क्या सिर्फ़ देश की सरकारें ही हैं बेरोजगारी की ज़िम्मेदार?

देश में सरकार अपने तरीके के इन सुधारों की ओर क़दम जरुर बढ़ा रही है, लेकिन कोई कारगर परिणाम अभी तक दिखना शुरू नहीं हो सका है, हालाँकि इसके लिए सिर्फ सरकार को ही पूरी तरह से ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता | सोचने वाली बात यह है कि ‘क्या हम वाकई में हुनरमंद हैं ?’ 

क्या आप जानते हैं क्या है आपका हुनर?

दरसल, देश के हालातों के साथ साथ हमारी शिक्षा प्रणाली में भी कुछ सुधारीकरण की आवश्यकता अब नज़र आने लगी है | हम ख़ुद देखते हैं, कि असंख्य नौजवान डिग्रीधारकों में शुमार हैं, लेकिन क्या उनके पास उस क्षेत्र की उचित कार्यकुशलता है? क्या असल मायनों में वह उस क्षेत्र के प्रति रूचि रखते हैं, और यदि हाँ, तो क्या कॉलेजों में प्रदान की जाने वाली शिक्षा आपने उचित स्किल उत्पन्न कर पा रही है?

ये कुछ ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब काफ़ी निरशाजनक हैं, और असल मायनों में यह बढ़ी बेरोजगारी की दिशा में अहम क़िरदार निभातें हैं |

हुनर को पहचाने, और ख़ुद बनाए अपनी राह

हम सब जानते हैं, आज के दौर में सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों में नौकरियों के अवसर दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है | तो ऐसे में हमें क्या करना चाहिए |

आपको हर कोई इसका जवाब देगा कि मेहनत करिये, सरकारी नौकरी के लायक बनाइये ख़ुद को, या फ़िर प्राइवेट क्षेत्रों में निरतंर अवसरों की तलाश करते रहिये | लेकिन इन सब के अलावा भी आपके पास एक स्मार्ट रास्ता है, और होना भी चाहिए, क्यूंकि जब इस दौर में आपका फ़ोन तक स्मार्ट हो रहा है, तो आप क्यूँ पीछे रहें |

दरसल, हमारा सुझाव यह है कि अगर बाज़ार में नौकरी नहीं है, तो आप बेकार में वक़्त न गवाएं, ख़ुद से नए-नए विकल्प पैदा करें, जैसे- ‘फ्रीलांसिंग’ |

शुरुआती क़दम को लेकर काफ़ी कठनाई आयेंगी, लेकिन यकींन कीजिये यदि एक बार आप इस क्षेत्र में जम गए तो आपके अंदर एक अलग सा गर्व, आत्मविश्वास और आत्मसम्मान पैदा होगा | ये आत्मविश्वास और आत्मसम्मान आपकी शक्ति को दुगना करके आपको अपने क्षेत्र में और बेहतर होने में मदद करेगा |

आप सिर्फ इस बात से हताश नहीं हो सकते कि आर्थिक विनाश के इस दौर में क्या किया जाये, क्यूंकि कहते हैं,

‘विनाश जितना बड़ा होता है, वह उतने ही सृजन के मौके भी पैदा करता है’

अब तक इस देश की अर्थव्यवस्था को अर्थशास्त्रियों ने बहुत चला लिया, लेकिन अब वक़्त आ गया है कि युवा इस क्षेत्र से जुड़े | इसके लिए हमें अपनी शिक्षा प्रणाली में भी सुधार करना पड़ेगा | ऐसे सुधार जो मूल्यों को तो मजबूत करें ही, लेकिन साथ ही साथ युवाओं को ऐसे तैयार करें कि दसवीं या बाहरवीं कक्षा के बाद ही वे फ्रीलांसिंग जैसे विकल्प को चुन कर देश की अर्थव्यवथा से जुड़ कर आत्मनिर्भर बन सकें, ताकि भविष्य में उनके बाद रोजगार के ढेरों विकल्प मौजूद हों |

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता की फ्रीलांसिंग एक तेज़ी से बढ़ता विल्कप है, जिसे पहले तो सिर्फ कला क्षेत्र से जुड़े लोग चुनते थे, लेकिन अब लगभग हर क्षेत्र में इसके विकल्पों का प्रसार हुआ है, जैसे- लेखन, फोटोग्राफी, फैशन, डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग, पब्लिक रिलेशन, पर्यटन इत्यादि | 

फ्रीलांसर बनने के लिए आपके पास विषय की अच्छी जानकरी होनी चाहिए | इसके साथ-साथ बेहतर नेटवर्किंग आपको उपभोक्ताओं से जुड़ने और उनकी मांगों को समझने में भी मदद करती हैं | आप जिस क्षेत्र में भी फ्रीलांसर बनने के मौके तलाश रहें हैं, उस क्षेत्र की कंपनियों, संस्थाओं और उनकी सेवाओं को बेहतर ढंग से समझें ताकि एक फ्रीलांसर बनने के बाद आप उन संस्थाओं को भी अपनी सेवाएं दे सकें | इस क्षेत्र में आप अपने काम और योग्यता के आधार पर 500 से 50000 या उससे भी अधिक कम सकतें हैं, और एक आत्मनिर्भर युवा बन, देश की अर्थव्यस्था में एक सकारात्मक योगदान दे सकतें हैं |

जरा सोचिये अगर दसवीं और बाहरवीं कक्षा के बाद ही विद्यार्थी फ्रीलांसिंग के जरिये अपनी आर्थिक नीव का विकास कर लेते हैं, तो ग्रेजुएशन के बाद  वह अपनी इस नींव पे सपनों के महल भी आसानी से बना पायेंगें |

 

 

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