June 19, 2018
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गुजरात सीएम: आख़िर क्यूँ फ़िर से विकल्प बनकर उभरे विजय रुपाणी?

  • by Ashutosh
  • December 22, 2017

हालही में हुए गुजरात चुनाव में बीजेपी ने 99 सीटें जीत कर जहाँ एक बार फ़िर से बीजेपी ने अपनी जीत जा सिलसिला ज़ारी रखा, वहीँ इस चुनाव में एक मजबूत तौर पर उभर रही कांग्रेस मात्र 77 सीटों पर सिमत कर रह गई।

इन चुनावों में जीत भले ही बीजेपी की हुई हो, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों की तुलना में इस चुनाव के नतीज़े बीजेपी के लिए तुलनात्मक रूप से थोड़े निराशाजनक रहे। हम आपको बता दें कि गुजरात में 22 साल में बीजेपी को इस बार सबसे कम सीटें मिली हैं। दसरल इस चुनाव के दौरान बीजेपी की कार्यरत सरकार को कई ऐसे मुद्दों का सामना करना पड़ा जहाँ सरकार कई ओर से घिरती दिखी और कहीं न कहीं इसका ज़िम्मेदार, बतौर मुख्यमंत्री सरकार का नेतृत्व कर रहे विजय रुपाणी को माना जा रहा था।

शायद यही कारण रहा कि इस बार भी बीजेपी ने गुजरात तो जीत लिया, लेकिन तुलनात्मक रूप से बीजेपी का प्रदर्शन बहुत उत्साहदाई नहीं रहा और इसी के चलते यह माना जा रहा था कि इस जीत के बाद बीजेपी इस बार गुजरात में आगामी सरकार का अपना चेहरा बदल सकती है।

हालाँकि इन सब अटकलों पर आज विराम लगाते हुए, भारतीय जनता पार्टी की विधायक दल की बैठक में एक बार फ़िर से मुख्यमंत्री पद के लिए विजय रुपाणी के नाम पर मुहर लगा दी गई है। इस बात की जानकारी बैठक के बाद अरुण जेटली ने दी और साथ ही डिप्टी सीएम के पद के लिए नितिन पटेल के नाम की भी पुष्टि की गई।

विजय रुपाणी ही क्यूँ बने अंतिम विकल्प? 

  • कमज़ोर नहीं दिखना चाहती बीजेपी, 

इस बात में कोई संदेह नहीं की बीजेपी की इस जीत के बाद भी कहीं न कहीं पार्टी को ख़ुद यह एहसास है कि इस बार बीजेपी अपने ही पिछले प्रदर्शनों से हार गई है, और ऐसे में विजय रूपाणी को हटाया जाना साफ़ तौर पर यह संदेश देता कि पार्टी ख़ुद कहीं न कहीं यह समझती है कि रूपाणी का प्रदर्शन बतौर मुख्यमंत्री बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता। शायद इसी प्रतीकात्मक संदेश से बचने  के लिए एक बार फ़िर से रूपाणी को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी प्रदान की जा रही है।

  • आगामी लोकसभा चुनाव भी बने मज़बूरी, 

आपको याद ही होगा कि पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने गुजरात की सभी 26 सीटों पर जीत का परचम लहराया था और अब जब एक बार फ़िर लोकसभा चुनाव इतने नजदीक आ चुकें हैं, तो पार्टी ऐसे में अपने गुजरात संगठन में कोई बड़ा बदलाव नहीं करना चाहेगी और साथ ही पुराने लोगों पर भरोसा जाता कर एक बार फ़िर आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव को अपने नाम करना चाहेगी।

  • मोदी के विश्वसनियों में से एक हैं रूपाणी, 

इस बात में कोई दोहराए नहीं है कि विजय रूपाणी हमेशा से ही मोदी के विश्वसनियों में से एक रहें हैं और ऐसे में मोदी ख़ुद भी नहीं चाहेंगें कि पार्टी के अंदर यह संकेत जाए कि पार्टी का अपने ही विश्वसनियों के ऊपर से भरोसा उठता जा रहा है।

कई अन्य भी थे दावेदार

ऐसा बिल्कुल भी नहीं कि गुजरात बीजेपी में अन्य नामों की चर्चा नहीं की गई, दरसल जीत के बाद से ही मुख्यमंत्री पद के लिए ‘पुरुषोत्तम रूपाला’ और ‘स्मृति ईरानी’ को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा था। साथ ही पांच बार से विधायक जयराम ठाकुर को भी एक प्रबल दावेदार के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन कहा यह जा रहा है कि धूमल गुट जयराम ठाकुर को मुख्‍यमंत्री बनाए जाने से सहमत नज़र नहीं दिखाई पड़ा। इस बीच दिलचस्प मोड़ तब आया जब चुनाव के ठीक पहले उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने यह कहते हुए सबको हैरान कर दिया कि मुख्यमंत्री के नाम का फ़ैसला विधायक दल की बैठक के बाद ही लिया जाएगा।

खैर! इस दौरान दिलचस्प यह भी रहा जब वर्तमान मुख्यमंत्री विजय रुपाणी और उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने गुरुवार को ही गुजरात के राज्यपाल ओ पी कोहली को अपना-अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिससे ऐसे कई राजनीतिक अटकलों का दौर शुरू हो गया।

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