April 20, 2018
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कैरियर: भारत में आज भी क्यूँ आसान नहीं अपने ‘सपनों के साथ खड़े’ रह पाना?

  • by Ashutosh
  • February 4, 2018

हम सब ने अपनी अपनी ज़िन्दगी में कभी न कभी किसी और से या ख़ुद अपने ही मुख से निकले इन शब्दों को जरुर सुना होगा,

” काश मैंने ये कर लिया होता, या इसी में कैरियर बना पाता ! “

इस सब बातों को बताने से पहले मैं आपका ध्यान इस लेख के शीर्षक की ओर लाना चाहूँगा | मैंने ‘सपनों को पूरा करने संबधी’ सवाल को नहीं उठाया है, इसके बजाए मैंने ‘सपनों के साथ खड़े रह पाने’ की बात कही है |

दरसल शायद आप भी मेरी इस बात से इतेफाक रखें कि भारत में आज भी किसी युवा के लिए उसके ‘सपनों को पूरा’ करने से पहले कहीं ज्यादा कठिन होता है, ‘सपनें के साथ खड़े’ हो पाना |

सामान्य तौर पर जब भी ऐसे विषय उठते हैं कि ‘आख़िर क्यूँ भारतीय युवा अपने जुनून अपने सपनों को ही अपना कैरियर बनाने के लिए संघर्ष करते दिखाई पड़ते हैं?’, ऐसे में कई लोग कुछ कारणों के साथ सामने आतें हैं, जैसे आर्थिक कठिनाइयाँ, परिवार की बंदिशें, पारंपरिक ढर्रो को ही सही मामने वाला समाज इत्यादि |

कितना सही है ‘पारंपरिक ढर्रो’ पर ही विश्वास बनाए रखना?

जब आप ख़ुद कभी अपने किसी सपने को पूरा करने या अपने जुनून का पीछा करने जैसे ख्याल के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर सबसे पहला ख्याल आता है कि, ‘अगर मैं कामयाब नहीं हुआ तो?’, ‘अगर लगाए हुए पैसे डूब गये तो?’, ‘नाकामयाबी पर आसपास वाले ताने देने लगे तो?’ |

क्या आप जानते हैं, कहीं न कहीं इन सवालों का असल कारण है, हमारा बचपन से अब तक का सफ़र | जी हाँ! याद कीजिये बचपन से शुरू होने वाली शिक्षा के मायने बड़े होते होते, इस बात पर आकर सिमट जाते हैं कि ‘जो चीज़ें सालों से चली आ रहीं हैं, वह ही सही और सुरक्षित हैं, लेकिन पारंपरिक ढर्रो के अलग सोच रखना जोख़िम भरा साबित हो सकता है’ 

‘समाज और परिवार’ नहीं, आप ख़ुद हैं सपनों के दफ़न होने के ज़िम्मेदार,

यह बात सच है कि आज भी हमारा समाज उतने खुले तौर पर नई सोच और पद्धतियों को बढ़ावा नहीं देता, लेकिन बॉलीवुड की फ़िल्मी दुनिया से परे, कभी आपने सोचा है कि अपने सपनों और जुनून को कैरियर का रूप देने की बात पर, आप ख़ुद कितना आत्मविश्वास दिखाते हैं |

एक शोध के मुताबिक माना जाता है कि भारत में आज भी 60 से 70 प्रतिशत युवा वर्ग, जिनके पास ख़ुद की प्रतिभा होते हुए भी, वह अपने कैरियर का चुनाव, आसपास के लोगों से ही प्रभावित होकर करता है | यह कितना सही है? हालाँकि किसी से प्रभावित होने में कोई बुराई मुझे भी नज़र नहीं आती, लेकिन किसी के प्रभाव में आकर अपनी सोच को इस कदर बदल लेना की आप अपनी मूल प्रतिभा से ही दूर हो जाए, इसको बेशक ठीक नहीं कहा जा सकता |

हम सब आज अक्सर कई ऐसे उदारहण देखते हैं, जिन्होंने पारंपरिक ढर्रो से अलग जाकर, अपनी प्रतिभा को पहचाना और एक बड़ा मुकाम हासिल किया |

अब जरा इस बात से ख़ुद को जोड़ने की कोशिश कीजियेगा, ऐसी प्रेरणादायक उदाहरणों को देखने, सुनने या पढ़ने के बाद सबसे पहला ख्याल क्या आता है? 

असल में ऐसी चीज़ों के बाद हर कोई (विशेष रूप से युवा वर्ग), एक पल को ही सही, लेकिन कहीं न कहीं यह सोचने लगता है कि आख़िर मेरे अंदर क्या ख़ास है और मैं कैसे उसको एक कैरियर का रूप प्रदान कर सकता हूँ? लेकिन इसके बाद क्या? दरसल, इसके बाद हम बिना किसी पेशेवर से इस पर बात किए, इस पर बिना किसी आयाम को तलाशे, ख़ुद को ही मन में समझाने लगतें हैं, कि आख़िर हम किन बंदिशों के कारण ऐसा नहीं कर पाए या नहीं कर पा रहें?  

असल में यही एक बड़ा फर्क होता है, उन लोगों और हमारे बीच, जिनकी सफ़लता की कहानी हमनें कुछ देर पहले ही पढ़ी होती है | 😉 

दरसल कई बार कुछ बंदिशें ऐसी होती हैं, जिन्हें थोड़ी मेहनत से तोड़कर हम कैरियर में आगे बढ़ सकतें हैं, लेकिन ख़ुद से ख़ुद के सवालों का जवाब देते वक़्त हम ऐसी बंदिशों को भी काफ़ी बड़ा बना लेते हैं या यूँ कहें तो इनकी आड़ में छिप वहीँ सपनों को दफ़न कर देते हैं | इस बारे में ख़ुद पूर्व राष्ट्रपति कलाम साहब ने कहा है,

“सबसे बुरा होता है सपनों का मर जाना”

पेशेवर बनाए अपने सोचने का तरीका,

उपरोक्त हुई सभी बातों का एहसास सब को होता है, लेकिन क्या है इसका असल समाधान? मेरा ऐसा मानना है कि भारत में आज भी सबसे बड़ी कमी है, ‘पेशेवर परामर्श या सलाह’ हासिल कर पाने की |

जी हाँ! कभी मन में अपने जुनून और कैरियर को लेकर आए सवालों को उस क्षेत्र के किसी पेशेवर से साझा करिये, और आप पायेंगें की आपके पसंदीदा क्षेत्र में आगे बढ़ने हेतु आपको कुछ नए रास्तों और विकल्पों की जानकारी हुई है |

इसको मैं एक मात्र समाधान नहीं मनाता, न मैं यहाँ इनकी तरफ़दारी कर रहा हूँ, लेकिन हाँ! यह एक महत्वपूर्ण समाधान जरुर है, क्योंकि इसके बाद आप कल्पना के आधार पर जवाब नहीं पाते, बल्कि आप शोध रूप से उस क्षेत्र में मौजूद व्यापक विकल्पों को समझ पातें हैं |

मेरे उपरोक्त सभी शब्दों का मूल यह है कि सपनों को कैरियर बनाने हेतु मन में आए सवालों का ख़ुद से जवाब देकर, उन्हें वहीँ खत्म करने की परंपरा अब बंद होनी चाहिये, इसकी बजाए शुरू कीजिये सवाल पूछने की परंपरा का, वह भी पेशेवरों से, ऐसे पेशेवर जो आपके पसंदीदा कैरियर चुनाव को लेकर आपको सटीक और व्यापक आयाम प्रदान करें, जिसके जरिये सिर्फ मन तक रह जाने वाले आपके सपनों और सवालों को एक रास्ता मिल सके | 

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