August 16, 2018
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मुज़फ़्फ़रनगर दंगों में भाजपा नेताओं पर हुए मुकदमों को वापस लेने पर विचार कर रही है योगी सरकार ?

  • by Ashutosh
  • January 22, 2018

लगता है योगी सरकार प्रदेश के पहले पार्टी की छवि का विकास चाहती है, शायद यही वजह है कि योगी सरकार ने पहले तो स्वयं मुख्यमंत्री योगी से जुड़े मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया का आगाज़ किया और अब इसी श्रृंखला में कुछ वर्षों पूर्व हुए मुज़फ़्फ़रनगर दंगों में जिन भाजपा नेताओं के खिलाफ़ कई धाराओं में मुकदमें दर्ज़ किए गये, सरकार अब उन्हें भी वापस लेने पर विचार कर रही है |

दरसल, उत्तर प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा मुज़फ़्फ़रनगर जिलाधिकारी को एक पत्र लिख, 2013 में हुए ‘मुज़फ़्फ़रनगर दंगें’ के मामले में भाजपा नेताओं के खिलाफ एक अदालत में लंबित नौ आपराधिक मामलों को वापस लेने की संभावना पर सूचना मांगी है | इसके साथ ही इस पत्र में मुज़फ़्फ़रनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से भी इस मसले पर उनका विचार मांगा गया है |

पांच जनवरी को जिलाधिकारी को लिखे एक पत्र में उत्तर प्रदेश के न्याय विभाग में विशेष सचिव, राज सिंह ने जिलाधिकारी से 13 बिंदुओं पर जवाब मांगा है, जिसमें एक बिंदु यह भी है कि

‘क्या भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ मामला वापस लेना जनहित में सही होगा?’

हम आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश राणा, सांसद भारतेंदु सिंह, विधायक उमेश मलिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और पार्टी नेता साध्वी प्राची के खिलाफ मामले दर्ज हैं |

हालाँकि इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक जिला प्रशासन ने इस तरह के किसी भी पत्र को प्राप्त करने की बात स्वीकार नहीं की है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि हो सकता है कि एक- दो दिन में उन्हें यह पत्र मिल जाए |

बिना नाम लिखे दिए गए हैं संकेत,

हम आपको बता दें की ख़बरों के मुताबिक पत्र में किसी भी नेता के नाम का जिक्र नहीं है, लेकिन इसकी बजाए पत्र में उनके खिलाफ दर्ज मामलों की फाइल संख्या का जिक्र किया गया है |

इन नेताओं में लगे आरोपों में निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने, नौकरशाहों के काम में बाधा डालने और उनको गलत तरीके से रोकने जैसे आरोप हैं, जिनको लेकर ये भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत इन आरोपों का सामना कर रहे हैं |

क्या था मुज़फ़्फ़रनगर दंगें?

दरसल 2013 प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल के दौरान अगस्त और सितंबर महीने के बीच मुज़फ़्फ़रनगर और इसके आसपास के इलाकों में सांप्रदायिक झड़प हुई थी, जिसमें हुई हिंसा में 60 लोगों की मृत्यु हो गई थी और साथ ही इसके कारण 40,000 से ज़्यादा लोगों को विस्थापित होना पड़ा था |

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