May 24, 2018
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हज़ार धमकियों के बाद भी ‘अजय लांबा’ ने आरोपी आसाराम को सज़ा दिलवाकर ही लिया दम

  • by Ashutosh
  • April 26, 2018

 

कहते हैं न, कुछ हमारे ही बीच मौजूद लोग कई बार ऐसी मिसाल कायम कर जाते हैं, जिससे इंसानियत, ईमानदारी और इंसाफ कि आस आज भी समाज में बरक़रार है | और इस बार ऐसा ही एक उदाहरण पेश किया है सीनियर पुलिस ऑफिसर ‘अजय पाल लांबा’ ने, जिन्होंने आसाराम प्रकरण में न सिर्फ़ आरोपी आसाराम को गिरफ्तार किया बल्कि इसके बाद जाँच में पूरी ईमानदारी बरतते हुए, जल्द से जल्द साक्ष्य जुटा अदालत में पेश किये, हालाँकि इस दौरान ख़ुद अजय लांबा ने बताया कि उन्हें जान से मारने की क़रीब 2000 से धमकियाँ फ़ोन कॉल और खतों के माध्यम से दी गई, लेकिन उन्होंने अपना कर्तव्य निभाना नहीं छोड़ा और शायद उसी का नतीज़ा है कि आरोपी बाबा को ताउम्र कारावास की सज़ा हुए |

साथ ही हम आपको बता दें इस मामले में अदालत ने आसाराम के साथ दो और लोगों को दोषी करार दिया गया है और उन्हें 20-20 साल के कैद की सज़ा सुनाई है | इस मामले में कुल पांच लोग आरोपी थें, जिनमें से दो लोगों को बरी कर दिया गया है |

फ़ैसला आने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अजय पाल लांबा ने कहा,

” यह एक ऐतिहासिक फ़ैसला है, 2013 में स्वतंत्रा दिवस की रात नाबालिक से बलात्कार मामले में पीड़िता को न्याय मिला, यह सत्य की जीत है ”  

बच्चों और पत्नी का घर से निकलना करना पड़ा था बंद,

लांबा के अनुसार उस वक़्त वह जोधपुर में डिप्टी कमिश्नर थे, जाँच के दौरान अभद्र भाषा में लिखे ख़त आते थे, जिनमें लिखा होता था कि अगर आसाराम को कुछ हुआतो  तुम्हारे परिवार को मार देंगें | उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें अपनी बेटी को स्कूल भेजना बंद करना पड़ा और साथ ही जान के ख़तरे के डर से उनकी पत्नी का भी घर से निकलना बंद करना पड़ा |

कई गवाहों को मारा गया और जजों को भी धमकाने कि कोशिशे हुई,

इस पूरी जाँच के दौरान आसाराम और उसके गुंडों ने कई गवाहों कि हत्या तक करवाई और साथ ही जाँच में शामिल डॉक्टरों और जजों को भी बराबर धमकियाँ दी गई |

समाज को बदलनी होगी अपनी सोच, 

इस मामले से एक बात एक बार फिर सामने आई है, ऐसी नीच बाबाओं को जितना दोषी कहा जाए, लेकिन कुछ दोष हमारा भी है, जो हम ऐसे बाबाओं कि अंधभक्ति में लीन हो जाते हैं | मेरी यही गुजारिश है कि पढ़े लिखे समाज में आदर करने का संस्कार होना चाहिए, अंधभक्ति का नहीं |            

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