July 17, 2018
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शर्मनाक: ‘कानून हाथ’ में लेकर ‘क़ानूनी संरक्षण’ की माँग

  • by Ashutosh
  • April 2, 2018

 

आज देश के लिए एक और शर्मनाक दिन रहा | आज अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गये बदलाव के विरोध में दलित संगठनों ने आज (सोमवार 2 अप्रैल, 2018) को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया था |

असल में दलितों और आदिवासियों के उत्पीड़न में सीधे गिरफ्तारी और केस दर्ज कराने संबंधी नियमों में देश की सर्वोच्च अदालत ने बदलाव किये हैं, जिसका कई दलित संगठन और राजनीतिक पार्टियाँ विरोध कर रहीं हैं | यहाँ तक कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एससी/एसटी एक्ट मामले में पुनर्विचार याचिका दायर की है |

इसी के चलते  के आज भारत बंद का आह्वान किया गया था, जिसका सीधा असर बिहार, ओडिशा और पंजाब सहित देश के कई राज्यों में देखने को मिला, और उत्तर प्रदेश के मेरठ में प्रदर्शनकारियों ने तो सारी हदें पार करते हुए एक पुलिस चौकी को भी आग लगा दिया | इतना ही नहीं इस प्रदर्शन के दौरान अब तक 7 लोगों की मौत भी हो चुकी है | 

इतना ही नहीं कुछ न्यूज़ चैनलों में प्रदर्शन के दौरान फायरिंग करते एक शख्श का विडियो भी सामने आया |

काफ़ी शर्मनाक है ऐसा प्रदर्शन

इस प्रदर्शन का विषय चाहे जो रहा हो, लेकिन काफ़ी शर्मनाक बात यह है कि आप पहले तो सड़क पर देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले का विरोध कर रहें हैं, जिसका आपको अधिकार है, लेकिन ये जो प्रदर्शन के नाम पर उपद्रव सड़कों पर हुआ, यह देश ही नहीं अदालत का भी अपमान है | जिस तरह की हिंसक घटनाएं सामने आयीं हैं, उससे यह तो साफ़ है, कि माँग कुछ भी हो, लेकिन इसका भी फ़ायदा उठाने वाले समाज कि शांति को ताक़ में रख, उसको सुलगाने के प्रयास में लग गयें हैं | और इसमें वो लोग भी बराबर दोषी हैं, जो ऐसे उपद्रवी तत्वों का साथ सड़कों पर दे रहें हैं | ऐसे लोग सिर्फ़ हिंसा और मारपीट का सहारा लेकर बात के आधार को खत्म ही नहीं कर रहे, बल्कि इसको और दागदार बना रहें हैं |

सरकार ने डाली पुनर्विचार याचिका, फ़िर ये हिंसा और उपद्रव क्यूँ ? 

जो लोग आज सड़कों पर उतरे, उनसे मेरा एक ही सवाल है, अगर आप सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से इतेफाक नहीं रखते, तो सरकार ने भी इस पर आपकी राय को समझतें हुए, पुनर्विचार याचिका दायर करने कि बात कही है, तो फिर ऐसे सड़कों पर उपद्रव करने का क्या मलतब है | और अगर आपको सांकेतिक प्रदर्शन करने ही है, तो लोकतंत्र में उसके लिए भी एक सम्मानित ढंग है, ऐसे हिंसक और उपद्रवी तत्वों को बढ़ावा देखकर आप तो खुद को भी गलत साबित कर रहें हैं |

‘जातिवादी तत्वों ने भड़काई हिंसा’

वहीँ आज दलित संगठनों द्वारा आयोजित भारत बंद के दौरान हुई हिंसा की बसपा सुप्रीमो मायावती ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा बसपा आंदोलन का समर्थन करती है, लेकिन इस दौरान हुई हिंसा को जायज नहीं ठहराती |

 

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