April 27, 2018
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“धाँधली / पेपर लीक”: देश की परीक्षा व्यवस्था में जुड़ता एक ‘नया चरण’

  • by Ashutosh
  • March 30, 2018

देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की बात करें या अब बोर्ड परीक्षाओं की, लिखित और अन्य चरणों में कहीं न कहीं आज कल एक नया चरण जरुर देखने को मिल रहा है, और वह है, ‘पेपर लीक’, ‘धाँधली’ या ‘कोर्ट केस’ का चरण | इस नए चरण के बिना अब देश में कोई भी परीक्षा करवाना मानों के कल्पना मात्र ही रह गया है |

आपको इसके उदाहरणों से अवगत कराने कि जरूरत नहीं, हाल ही में आप सभी देश भर में एसएससी और सीबीएसई कि परीक्षाओं में हुए धाँधली के विवाद को उग्र रूप लेते देख ही रहें हैं | हालाँकि ज्यादा परेशान होने कि जरूरत नहीं, क्यूंकि यह कोई नई बात नहीं, बस अब प्रतिष्ठित संस्थानों (जो देश के युवा वर्ग की शिक्षा और रोजगार के लिए ज़िम्मेदार हैं) में भी धाँधली का यह चरण जुड़ने से इतना शोरगुल है, अन्यथा सालों से उत्तर प्रदेश कि बोर्ड परीक्षाएं हों, व्यापम हो या अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परिक्षाएं, हमनें तो मानों धाँधली को एक कड़वा लेकिन वास्तविक सत्य मान कर अपना ही लिया था, है न? 

क्यूंकि कई सालों से ऐसी परीक्षाओं के चलते, युवाओं के भविष्य से खेलने के कई ऐसे बड़े मामले सामने आते रहे, लेकिन शायद हिन्दू मुस्लिम, या जाति-धर्म जैसे राजनीतिक मुद्दों के आगे हमें युवाओं के भविष्य को इतनी तवज्जों देना उचित नहीं समझा कि इनके खिलाफ़ एकजुट होकर आवाज़ उठाएं और ज़िम्मेदार लोगों को विवश करें कि वह अपनी ज़िम्मेदारी ईमानदारी से निभाएं |

लेकिन शायद इन अनियमिताओं के खिलाफ़ आवाज़ उठाने जैसी उपरोक्त बातें आज के समाज में कल्पना मात्र हैं, इनका वास्तविकता से कोई सीधा संबंध नहीं | क्यूंकि अगर ऐसा न होता तो शायद इस देश में व्यापम जैसे घोटाले को इतनी आसानी से लोगों ने दरकिनार न किया होता, न ही उसके खिलाफ़ आवाज़ उठाने वाले सच्चे लोगों को समाज में ही दर कर रहना पड़ता | 

हालाँकि ऐसा नहीं कि हमनें एक जुटता नहीं दिखाई है, पद्मावत को भूल गये क्या जनाब! जब देश के बड़े बड़े संगठन एक साथ आकर इतिहास को बचाने में अपनी जान फूंकने और दूसरों कि जान लेने तक को तैयार थे | 

अब इन संगठनों को शायद इतिहास संरक्षण का कोई और काम मिल गया होगा, तभी शायद वह युवाओं के भविष्य संरक्षण हेतु आगे नहीं आ रहे, या फिर उन्हें आगे किया ही नहीं जा रहा, क्यूंकि जिन पार्टियों के समर्थन से ये संगठन इतने बड़े बड़े आंदोलनों को अंजाम देते हैं, ऐसी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और जाँच से कहीं उन पार्टियों का अस्तित्व ही खतरे में न आ जाए |

खैर! मेरा एक सवाल लोगों से भी है, सोशल मीडिया में आप धर्म जाति से जुड़े पोस्ट को शेयर करना ही अगर अपनी एकमात्र ज़िम्मेदारी समझते हैं, तो फिर आपको क्या हक़ है कि आप in धांधलियों के खिलाफ़ सवाल कर पाएं | जरा सोचिये अगर आप अभी भी नहीं जागे, और गुमराह करने वाले मुद्दों से परे, आज के दौर के सबसे बड़े वास्तविक और महत्वपूर्ण मुद्दे, “रोजगार” पर आप खुल कर सामने नहीं आये, इसकी पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए आज कुछ करना अपना फ़र्ज़ नहीं समझा, तो शायद कल को आप या आप के बच्चों कि भी रोजगार आपने की मेहनत पर ये धाँधली का चरण अपना दाग छोड़ जाए |

इसलिए सभी से यही अनुरोध है, कि देश में महँगी होती शिक्षा और कम होते रोजगार और उसमें भी बढ़ती धाँधली को गंभीरता से लें और इसके खिलाफ़ देशव्यापी एकजुटता दिखाते हुए, उन ज़िम्मेदार आकाओं को सोचने पर विवश करें कि अगर अब उन्होंने इन महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों को लेकर कुछ नहीं किया, तो यह देश और ख़ासकर युवा वर्ग उन्हें कब्भी माफ़ नहीं करेगा |

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