August 16, 2018
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महज़ 5 रुपये में हर रोज़ नोएडा के हज़ारों लोगों का पेट भर रहीं “दादी की रसोई”

  • by Ashutosh
  • May 30, 2018

कहते हैं  किसी भूखे को भोजन करवाने से ज्यादा बड़ी बात कोई नहीं होती। और शायद इसी बात को मानवता का आधार बना उत्तर प्रदेश के नोएडा में ‘दादी की रसोई’ महज़ 5 रूपये में रोजाना कई भूखे पेटों को भोजन करवाने का काम कर रही है। और सिर्फ इनता ही नहीं इस रसोई में पकने वाला खाना शुद्ध देसी घी में बनाया जाता है।

दरसल इस अनोखी और दिल को छू जाने वाली पहल क्ले जन्मदाता 60 वर्षीय समाज सेवक अनूप खन्ना जी हैं, जिन्होंने 2015 में दादी की रसोई की शुरुआत की थी। इनका उद्देश्य जरूरतमंदों तक सस्ती दर पर अच्छा घर का खाना उपलब्ध कराना है।

नोएडा में अपने दो स्टॉलों के साथ वह इस पहल को अंजाम दे रहें हैं। सुबह 10 से 11:30 बजे सेक्टर-17 में और दोपहर 12 से 2 बजे तक सेक्टर 29 में यह दो स्टॉल रोजाना अपने तय समय पर लोगों को भोजन करवाने का कार्य प्रारंभ कर देते हैं। इन स्टॉलों पर जरूरतमंद लोगों,  विद्यार्थी, कामकाजी व्यक्ति, रिक्शेवाले, दूकानदार और राहगीरों की लाइन दिखाई देती हैं।

‘दादी की रसोई’ नामक इस अनूठी पहल में अनूप की बेटी स्वाति सहित समस्त परिवार का भी भरपूर साथ मिलता है।

इसकी शुरुआत अनूप ने लगभग 30,000 रूपये की लागत की थी लेकिन आज बहुत से लोगों से ‘दादी की रसोई’ को दान स्वरूप मदद करने को आगे आ रहे हैं।

द लॉजिकल इंडियन को दिए इंटरव्यू में अनूप जी ने बताया,

“दुकानदार रियायती मूल्यों पर मुझे सामन देते हैं, इसके अलावा लोग जन्मदिन, शादी की सालगिरह आदि के उत्सव पर ख़ास व्यंजन भी उपलब्ध कराते हैं, लोगों की तरफ से भी भरपूर साथ मिल रहा है”

इस बीच एक अनूठी बात जो अनूप ने सबसे साझा की वह यह कि वह चाहें तो खाना मुफ्त में भी दे सकते हैं लेकिन फिर भी वे न्यूतम 5 रूपये लेते हैं, जिसके पीछे एक दिलचस्प वजह है। दरसल अनूप कहते हैं,

“मैं चाहता तो ये खाना और कपड़े मुफ्त में भी दे सकता था, पर कम पैसे लेने की वजह सिर्फ यह है कि यहां भोजन करने वाले लोगों का स्वाभिमान बना रहे, हर तबके के व्यक्ति पांच रुपए देकर सम्मान से भोजन करते हैं, बाकि भोजन की गुणवत्ता का ध्यान मैं स्वयं रखता हूँ”

 

हम आपको बता दें कि अनूप जी ने सद्भावना स्टोर का भी आगाज़ किया है, जिसके तहत वे लोगों को कपड़े, जूते, और किताबें उपलब्ध कराते हैं।

अनूप जी की इस पहल को Where India Connects परिवार का एक सलाम। आप ऐसे ही लोगों की वजह से हमें यह एहसास होता है कि समाज में आज भी मानवता के मूल गुण पूर्णतः खत्म नहीं हुए हैं, जरूरत है तो बस गुणों को अपना कर मानवता के पेड़ को फ़िर से सींचने की।

सोर्स: The Better India

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