June 19, 2018
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“राष्ट्रवाद किसी क्षेत्र, भाषा या धर्म विशेष के साथ बंधा हुआ नहीं है” :प्रणब मुखर्जी

  • by Ashutosh
  • June 8, 2018

नागपुर में आरएसएस कार्यक्रम में शामिल हुए, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खुल कर राष्ट्रवाद और उसके मायनों के सन्दर्भ में अपने विचार प्रकट किये।

कार्यक्रम के दौरान श्री मुखर्जी ने आरएसएस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा,

” भारत की राष्ट्रीयता एक भाषा और एक धर्म में नहीं है, हम वसुधैव कुटुंबकम में भरोसा करने वाले लोग हैं, उन्होंने कहा कि भारत के लोग 122 से ज़्यादा भाषा, 1600 से ज़्यादा बोलियां बोलते हैं, यहां सात बड़े धर्म के अनुयायी हैं और सभी एक व्यवस्था, एक झंडा और एक भारतीय पहचान के तले रहते हैं,

घृणा और असहिष्णुता से हमारी राष्ट्रीयता कमजोर होती है, हमारा राष्ट्रवाद किसी क्षेत्र, भाषा या धर्म विशेष के साथ बंधा हुआ नहीं है, हमारे लिए लोकतंत्र सबसे महत्वपूर्ण मार्गदशर्क है, “

इन सब के साथ ही प्रणब मुखर्जी ने यह भी कहा,

” हमें अपने सार्वजनिक विमर्श को हिंसा से मुक्त करना होगा, साथ ही उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में हमें शांति, सौहार्द्र और प्रसन्नता की ओर बढ़ना होगा,

हमारे राष्ट्र को धर्म, हठधर्मिता या असहिष्णुता के माध्यम से परिभाषित करने का कोई भी प्रयास केवल हमारे अस्तित्व को ही कमजोर करेगा “

अपने इस संबोधन से पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी आरएसएस के संस्थापक सरसंघचालक केशव बलिराम हेडगेवार की जन्मस्थली पर गए और उन्होंने उन्हें भारत माता का महान सपूत बताया।

 

राजनीतिक तनातनी का भी रहा माहौल

जैसा की हम सबने देखा था आरएसएस के कार्यक्रम में जाने के मुखर्जी के फैसले से पहले एक राजनीतिक तनातनी का माहौल सा बन गया था। कई कांग्रेस नेताओं ने उनके फैसले की निंदा की थी। इन नेताओं में वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल भी शामिल रहे।

हालाँकि इस पर श्री मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा

” पिता जी आरएसएस के कार्यक्रम में भाषण देने के अपने फैसले से भाजपा और आरएसएस को झूठी खबरें फैलाने का एक मौका दे रहे हैं, उनका भाषण तो भुला दिया जाएगा और केवल तस्वीर ही बची रह जाएगी “

साथ ही कांग्रेस ने ट्विटर पर एक वीडियो जारी भी जारी किया और कहा कि  ‘यह नहीं भूलना चाहिए कि आरएसएस क्या है?’

वहीँ पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर हुए इस विवाद पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि

” यह ‘निरर्थक’ बहस है और उनके संगठन के लिए कोई भी बाहरी नहीं है “

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