July 17, 2018
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आख़िर किस ओर जा रहा है समाज? ‘धर्म की समझ’ न रखने वाले ही कर रहे धर्म के नाम पर ‘हिंसा’

  • by Ashutosh
  • April 1, 2018

हाल ही में आप अख़बार पढ़िए या न्यूज़ चैनल देखिये, हर कहीं आपको धर्म-जाति के नाम पर हो रही हिंसा कि ख़बरे आम होती नज़र आयेंगी | देश में बेरोजगारी, भूखमरी, किसानों कि बदहाल स्थिति जैसी समस्याओं कि कमी नहीं, लेकिन इसके बावजूद पूरा देश सिर्फ़ धर्म और जाति कि बहस करने और इसको लेकर हिंसा करने में मानों लिप्त नज़र आ रहा है |

आज कुछ लोगों ने अपने फ़ायदे के लिए ऐसी चीज़ों को बढ़ावा देकर, देशभर को असल मुद्दों के भटका सा दिया है, और वैसे इसको ऐसे लोगों कि बुद्धिमता कहें या हमारी नासमझी | आज के दौर में भी, जहाँ इंसान की बुनियादी जरूरतें ही उससे छिनती सी जा रहीं हैं, वहाँ हमने ऐसे लोगों को खुली छुट दे रखी है, कि वह हमें धर्म जाति के नाम पर बाँटने का काम करते हैं, और हम बड़ी सहजता से उनकी ये कोशिशें बर्दाश ही नहीं क्र रहें, बल्कि उनको पूरा बढ़ावा भी दे रहें हैं |

जनाब ! जरा इन धर्म जाति की लड़ाई से बाहर निकल कर देखिये, आपके बच्चों और देश के तमाम युवाओं के बाद रोजगार का अकाल है, आपको अन्न प्रदान कर आपका पेट भरने वाले किसान और उनके परिवार भूखमरी से मर रहें हैं, या आत्महत्या करने को मजबूर हैं, शहर में बढ़ रहे प्रदूषण ने लोगों का जीना दुशवार कर रखा है, लेकिन हम भला इसकी चिंता क्यूँ करेंगें, क्यूंकि हम तो अपने नेताओं और राजनीतिक पार्टियों द्वारा शुरू किये गए धर्म-जाति के मुद्दों में भी उलझें हैं, हमारे पास समय कहाँ हैं, इंसानों और इंसानियत के परिपेक्ष में सोचने के लिए | 

आप तो धर्म जाति के मुद्दों पर सड़कों पर उतरने का आह्वान करने वाले अपने महान नेताओं के गुलाम से बन कर रह गये हैं, आप भी एहसास है, कि युवा, किसान और देश इस समय कितनी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन नहीं! आप तो राजनीतिक फायदों के लिए धर्म जाति के नाम पर हिंसा करवा कर, राजनीतिक रोटियाँ सेकने वाले अपने महान नेताओं का कहा ही सुनेंगे, देखेंगे और कहेंगें | वो नेता जो खुद के बच्चों को तो उच्च शिक्षा के नाम पर विदेश भेज देते हैं, लेकिन आप लोगों को संस्कृति और धर्म को बचाने पर ज्ञान देते हैं और आपस में लड़वाते हैं | लेकिन धन्य हैं हम जो सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, ऐसे महान नेताओं कि गुलामी करने बैठ जाते हैं |

मेरा यही अनुरोध है कि अब जरा हम समय निकालें और खुद कि सोचने कि क्षमता का उपयोग करें, और जरा इस बात पर ध्यान दें कि धर्म के नाम पर भाषण देने वालों को क्या वाकई धर्म कि समझ है | और यदि है तो कौन सा ऐसा धर्म है, जो हिंसा कि इजाजत देता है, जो कहता है, कथित रूप से धर्म रक्षा के लिए सड़कों पर उतर आओ, भले ही वहीँ किसान और उनके परिवार  आत्महत्या कर रहें हों, युवाओं के भविष्य का तमाशा सा बना दिया गया हो|

खैर! फ़ैसला आपको करना है, आप वास्तिविक समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित कर उनको लेकर ज़िम्मेदार लोगों से सवाल करना चाहतें हैं, या फिर ऐसे ध्यान भटकाने और समाज को खोखला करने वाले मुद्दों पर ख़ुद को गुमराह करना चाहते हैं?

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