May 24, 2018
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जनता नहीं, पूर्ण रूप से ‘राज्यपाल’ तय कर रहे कि किसकी बने सरकार?

  • by Ashutosh
  • May 18, 2018

हाल ही में कर्नाटक चुनाव के नतीज़े आने के बाद अचानक से देश के सामने ऐसी स्थिति आ गई है, जो देश के संवैधानिक ढाँचे को कहीं न कहीं कमज़ोर करती दिखाई पड़ रही है | यूँ तो आप सभी चुनाव के नतीजों और उसके बाद सरकार बनाने संबधी विवादों को लेकर वाकिफ हैं | लेकिन इस बीच कुछ मूल सवाल हैं, जो अब शायद देश की जनता को अब राजनैतिक पार्टियों से पूछना शुरू कर देना चाहिए |

दरसल, इस पूरे प्रकरण की अगर गोवा, मणिपुर और अन्य कई राज्यों में हुए चुनाव के बाद पनपी स्थितियों से तुलना की जाए, तो हमें साफ़ तौर पर नज़र आता है कि अब देश में कैसे संवैधानिक पदों का सहूलियत के अनुसार इस्तेमाल करना शुरू कर दिया गया है | दरसल यहाँ किसी पार्टी विशेष को आरोपित किये जाने की बात नहीं की जा रही | बल्कि हम यह बताना चाहते हैं कि यह स्थिति वाकई भयानक है, जो लोकतंत्र की परिभाषा को ही खोखला कर रही है |

दरसल, कहीं न कहीं बीजेपी पर सवाल खड़े भी होते हैं, आखिर क्यूँ राज्य के राज्यपाल बीजेपी को फ़ायदा पहुँचाने के लिए एक तरफ़ जहाँ गोवा में गठबंधन को सरकार बनाने का न्योता देते नज़र आये थे, तो अब उसी आधार को कर्नाटक में क्यों नहीं दोहराया जा रहा? क्या कर्नाटक के लिए संवैधानिक नियम अलग है? क्या राज्यपाल किसी नियम नहीं बल्कि अपनी मर्जी से सरकार बनाने की ज़िम्मेदारी तय करने लगें हैं? 

हो सकता है आपको यह लेख बीजेपी विरोधी लग रहा हो, लेकिन मेरा मकसद कांग्रेस या किसी अन्य दल को सही साबित करने का नहीं, बल्कि इस देश के लोगो को यह एहसास दिलाने का है कि राजनैतिक दल कोई भी हो, लेकिन उनको संविधान से खेलने कि अनुमति नहीं देनी चाहिए |

दरसल ऐसी स्थिति में न सिर्फ जनता के सरकार चुनने के अधिकारों को नीचा दिखाया जाता है, बल्कि देश और देश की सर्वोच्च अदालत को भी अपना समय कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों से हटा कर, ऐसी राजनीतिक साजिशों को सुलझाने में देना पड़ता है |

देश के सामने बेरोजगारी, भुखमरी, बदहाल किसानों जैसे गंभीर मुद्दें हैं, लेकिन राजनैतिक पार्टियाँ सत्ता हासिल करने की लड़ाई ही लड़ रहीं हैं | अब देश के लोगों को जरूरत है कि आप प्रश्न करने उन जवाबदेह लोगों से जिन्हें आपने चुना है या जो आपके समक्ष चुनाव में वोट मांगने आते हैं | आखिर विस्तारित ढंग से लिखे संविधान में तोड़ मरोड़ क्र सत्ता हासिल करने की कोशिशों की बजाये, देश के सामने खड़ी अन्य महत्वपूर्ण समस्याओं को लेकर अब राजनैतिक दल इतनी ही गंभीरता दिखायेंगें?

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