May 24, 2018
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महज़ ‘क़ानून बनाने’ से पूरा नहीं होता सरकार का कर्तव्य, जरूरी है उसको ईमानदारी से लागू करना

  • by Ashutosh
  • April 22, 2018

देश में बढ़ती दुष्कर्म जैसी घिनौनी घटनाओं को खत्म करने के उद्देश्य से शनिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सजा के प्रावधान को और कठोर किया गया है, जिसके चलते 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वालों के लिए मृत्युदंड के प्रावधान वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी गई है।

  • इस अध्यादेश में 16 साल से कम उम्र की लड़की से बलात्कार के मामले में, न्यूनतम सजा को 10 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दिया गया है।
  • वहीं 12 साल से कम उम्र की लड़की के बलात्कार के लिए न्यूनतम सज़ा 20 साल का कारावास या आजीवन कारावास या फिर फांसी निर्धारित कि गई है।
  • साथ ही 16 साल से कम उम्र की लड़कियों के रेप के दोषियों को अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी। इन मामलों में जांच को 2 महीने में खत्म करना होगा।
  • ट्रायल पूरा करने के लिए 2 महीने का समय निर्धारित किया गया है।
  • साथ ही महिला दुष्कर्म के मामले में न्यूनतम सजा 7 साल से 10 साल तक, उम्रकैद तक बढ़ाई जा सकती है।

यह बेशक एक अच्छा कदम है, जिसका स्वागत होना चाहिए। और साथ ही हमें खुद भी ऐसे नीच कृत करने वाले लोगों का सामाजिक बहिष्कार भी करना चाहिए। लेकिन कुछ सवाल आज भी शेष हैं, यह काफ़ी ख़ुशी कि बात है कि प्रधामंत्री जी इस विषय पर काफ़ी गंभीर हैं और उन्होंने कानून में यह बदलाव लाये, लेकिन प्रधानमंत्री जी जब आपके ही नेता ऐसे दुष्कर्म करते हैं, तो आप और आपके चहेते मुख्यमंत्री खुल कर ऐसे नेताओं कि निंदा कर उनके खिलाफ़ कड़े क़दम उठाने कि बजाये, उनको बचाने या मामले को हल्का कर दबाने तक का प्रयास क्यों करने लग जाते हैं। जिसके चलते कहीं न कहीं आपकी इस मुद्दे को लेकर संवेदनशीलता पर सवालिया निशान लगना लाजमी है। 

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता, कि इस मुद्दे पर कड़े कानून की बेहद जरूरत है, लेकिन उससे ज्यादा जरूरत है सरकारों और ज़िम्मेदार लोगों कि साफ़ और ईमानदार नियत कि, जो इन कानूनों को ईमानदारी से लागू करवाए। देश में कानून तो बहुत हैं जनाब! लेकिन नेताओं और कुछ भ्रष्ट तंत्र के चलते इंसाफ कितनों को मिलता है, अगर यह आंकड़ा ईमानदारी से देश के पटल पर रखा जाए, तो शायद हम सबका सर शर्म से कभी उठ भी न पाए।

इसलिए देश में महज़ कानून बनाकर अपनी वाह-वाही लूटने का कोई मतलब नहीं, बल्कि जरूरत है कि देश कि राजनीतिक पार्टियाँ ऐसे मुद्दों पर एकजुट हों, और ईमानदारी से कानून कको अपना काम करने दें, और साथ ही देश के प्रधान सेवक सिर्फ़ अवसरवाद के तहत इस मुद्दे पर संवेदनशीलता न दिखाएं, बल्कि यदि अपनी खुद कि पार्टी में कोई ऐसे कृत करता है या कोई नेता ऐसे अपराधियों को बचाने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ़ भी सख्त रूप से करवाई कि जाए, करवाई के लिए पीडिता या उसके परिजनों कि मौत का इंतजार न किया जाए।   

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