August 14, 2018
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इस ‘न्यू इंडिया’ में “इंसानियत” की जगह, “नफ़रत” ने ले ली है: शर्मनाक

  • by Ashutosh
  • July 24, 2018

देश में पिछले कुछ सालों से मॉब लिंचिंग की घटनाएं लगातार सामने आ रहीं हैं। ‘मॉब लिंचिंग’ की सभी घटनाओं में एक समानता यह है कि गौ माँस संबंधी शक को लेकर कुछ लोगों की भीड़ इक्कठा होकर किसी भी निर्दोष व्यक्ति  मार देती है। दरसल यह घटनाएं अब ‘न्यू इंडिया’ का एक घिनौना चेहरा बनती जा रहीं हैं।

आज के वक़्त ये भीड़ जो अपने को गौ और धर्म रक्षक कहते हैं, दरसल इनसे देश को कहीं ज्यादा खतरा है, ये देश को अन्दर से खोखला ही नहीं, बल्कि समाज को विनाश की ओर ले जा रहें हैं। और आश्चर्य की बात यह है कि सरकार के कुछ मंत्री ही ऐसे अपराधियों को माला फूल पहना कर इनका हौसला बढ़ाते हैं। ऐसे में सरकार की भी मंशा के कहीं न कहीं सवाल जरुर खड़े हो जाते हैं?

हम आपको बता दें कि National Herald की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में पिछले 4 सालों में करीब 371 मॉब लिंचिंग के मामले सामने आ चुकें हैं, और इनमें से अभी तक एक भी केस में पीड़ित परिवार को इंसाफ नहीं मिला है वहीँ 30% मामलों में पीड़ित परिवार के खिलाफ़ ही केस दर्ज़ किया गया है, और 5% से अधिक मामलों में अपराधियों के खिलाफ़ कोई केस दर्ज़ नहीं हुआ है।

और शर्मनाक बात तो यह है कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्यवाई की ओर पहल करने की बजाये कई केन्द्रीय मंत्री या तो ऐसे अपराधियों की हौसलाअफजाई करते नज़र आते हैं, या ऐसी घटनाओं को मोदी के खिलाफ़ साजिश बता रहें हैं।

हम आपको बता दें की अलवर में हुई हाल ही की ऐसी शर्मनाक घटना राजस्थान में 205वीं ऐसी घटना है

वहीँ एनडीए एक घटक दलों ने भी अब इसके खिलाफ़ आवाज़ उठानी शुरू कर दी है, क्यूंकि वह शायद समझ रहें हैं कि अगर अब इन्हें नहीं रोका गया तो धर्म और गौरक्षा के नाम पर इस देश में जो अराजकता तेजी से बढ़ रही है, वह इस देश को खोखला करके रख देगी।

अकाली दल ने अपना रुख साफ़ करते हुए कहा कि

“अब हम खुलकर ऐसी घटनाओं के प्रति आवाज़ उठायेंगें, फ़िर चाहे गठबंधन रहे या टूट जाए”

वहीँ हाल ही में ही शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी सहयोगी दल भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि,

“जिस प्रकार आज देश में एक अलग ही हिंदुत्व का पालन किया जा रहा है, जिसमें गायों के नाम पर हत्या और महिला सुरक्षा की ओर कोई गंभीरता नहीं दिखाई दे रही है, ऐसे में बीजेपी को एक बार अपनी नीतियों के बारे में पुनर्विचार करने की जरूरत है”

इस बीच कुछ भी कहिये, लेकिन मॉब लिंचिंग को लेकर अगर सरकार के ही केन्द्रीय मंत्री ऐसा रुख अपनायेंगें, और अपराधियों का हौसला बढ़ाते हुए सार्वजनिक रूप से नज़र आने के बाद भी, अगर मोदी जी इस पर चुप्पी साधे रहेंगें, तो सरकार की मंशा पर भी शक होना लाजमी है।

आप सबसे एक गुजारिश है, एक बार जरा The Quint की इस रिपोर्ट में पीड़ित परिवारों की कुछ तस्वीरों को देखिएगा, एक बार आप भी ख़ुद से जरुर पूछेंगे, कि क्या ऐसा ही बनना चाहिए, “न्यू इंडिया”?

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