June 23, 2018
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शर्मनाक: ‘कानून हाथ’ में लेकर ‘क़ानूनी संरक्षण’ की माँग

  आज देश के लिए एक और शर्मनाक दिन रहा | आज अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गये बदलाव के विरोध में दलित संगठनों ने आज (सोमवार 2 अप्रैल, 2018) को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया था | असल में दलितों और आदिवासियों के उत्पीड़न में सीधे […]

आख़िर किस ओर जा रहा है समाज? ‘धर्म की समझ’ न रखने वाले ही कर रहे धर्म के नाम पर ‘हिंसा’

हाल ही में आप अख़बार पढ़िए या न्यूज़ चैनल देखिये, हर कहीं आपको धर्म-जाति के नाम पर हो रही हिंसा कि ख़बरे आम होती नज़र आयेंगी | देश में बेरोजगारी, भूखमरी, किसानों कि बदहाल स्थिति जैसी समस्याओं कि कमी नहीं, लेकिन इसके बावजूद पूरा देश सिर्फ़ धर्म और जाति कि बहस करने और इसको लेकर […]

“धाँधली / पेपर लीक”: देश की परीक्षा व्यवस्था में जुड़ता एक ‘नया चरण’

देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की बात करें या अब बोर्ड परीक्षाओं की, लिखित और अन्य चरणों में कहीं न कहीं आज कल एक नया चरण जरुर देखने को मिल रहा है, और वह है, ‘पेपर लीक’, ‘धाँधली’ या ‘कोर्ट केस’ का चरण | इस नए चरण के बिना अब देश में कोई भी परीक्षा करवाना […]

Deadpool Supporting ‘Swacchta Bharat Abhiyaan’-Twitterati goes crazy over Deadpool 2 Hindi Trailer

“Can you speak up? It’s hard to listen with the pity d*ck in your mouth” turns to “Zaraa zor se bolega? Aisa lag raha hai tu chocobar chus raha hai.” Pool bhai is here and the laughter riot has begun. Fox Star has released a Hindi dubbed version of the Deadpool 2 trailer and the […]

Newspapers or Ad-papers? Advertising takes over Print Media

“The media has enormous power. The media is undergoing huge changes now. It seemed like its time to step back and look at how media shapes our lives and our perceptions of reality.”- Thomas Hunt Morgan The first page of our Daily newspapers are siren calls that we do in fact need to step back […]

जिस देश में ‘पत्रकारिता’ महफूज़ नहीं उसको लोकतांत्रिक कहना कितना उचित है?

कहते हैं, किसी भी सफ़ल लोकतंत्र की नींव बिना एक स्वतंत्र, निष्पक्ष, भयमुक्त और ज़िम्मेदार मीडिया के नहीं रखी जा सकती है, और जब किसी देश का मीडिया को भी सरकारें और प्रशासन डराने और  धमकाने लगें, तो समझ जाइए, उस देश का लोकतांत्रिक अस्तित्व ख़तरे में हैं | कुछ ऐसा ही दौर शुरू हो […]

45 साल बाद फिर से देश में सुनाई देने लगी “चिपको” की गूंज: #ChipkoRe #SaveAarey

क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी, पानी और बयार। मिट्टी, पानी और बयार, जिन्दा रहने के आधार। ये वो पंक्तियाँ हैं, जिनकी गूंज 1973 में उत्तर प्रदेश के चमोली जिले से शुरू होकर, एक दशक के अन्दर पूरे उत्तराखण्ड क्षेत्र में भी सुनाई देने लगी थीं, और इन पंक्तियों का आधार था ‘चिपको आन्दोलन’ | दरसल भारत के उत्तराखण्ड राज्य […]

क़िरदार को निभाने नहीं, क़िरदार को ‘जीने’ वाले अदाकार: ‘फारुख शेख’

अगर आप उन भाग्यशाली लोगों में से एक हैं, जिन्होंने ‘चश्मे बद्दूर’ के किरदार सिद्धार्थ पराशर, ‘उमराव जान’ में नवाब कि भूमिका वाले किरदार और फिल्म ‘साथ-साथ’ के बेबस बेरोजगार युवक के क़िरदार को देखा है, तो शायद मुझे नहीं लगता आपको इन किरदारों को निभाने वाले शख्स ‘फारूख शेख’ की अदाकारी के बारे में कुछ […]

‘मानवता’ के काम आने में विफ़ल साबित हो रहीं हैं आज की ‘प्रतिभाएं’: प्रणब मुखर्जी

एक बार फिर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश में शिक्षा के मापदडों और उच्च शिक्षा के मायनों पर सवाल उठाया है | दरसल, प्रणब मुखर्जी ने कहा कि ” देश के तमाम क्षेत्रों में हर साल अनेकों प्रतिभाएं सामने आती हैं और लोग उनसे प्रभावित भी हो सकतें हैं, लेकिन इनमें से बहुत ही […]

Ditch him, Ladies! Soha Ali Khan tells us 5 Reasons why Urban women don’t need husbands anymore

Does he know that you like your eggs fried and not boiled? Or does he remember your monthly anniversary? And remember that time you were waiting for him for hours because he forgot that you guys had plans? Urban women these days love their maids more than they love their husbands. And it is pretty […]
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