June 19, 2018
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Tag Archives: Supreme Court

शर्मनाक: ‘कानून हाथ’ में लेकर ‘क़ानूनी संरक्षण’ की माँग

  आज देश के लिए एक और शर्मनाक दिन रहा | आज अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गये बदलाव के विरोध में दलित संगठनों ने आज (सोमवार 2 अप्रैल, 2018) को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया था | असल में दलितों और आदिवासियों के उत्पीड़न में सीधे […]

“इंसान को ‘जीने के अधिकार’ के साथ ही ‘मरने’ का भी हक़”: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कल एक बड़ा फ़ैसला सुनाते हुए, बीते कई समय से समाज के पटल पर चल रही एक व्यापक बहस और असमंजस कि स्थिति पर विराम लगा दिया है | दरसल, शुक्रवार को देश कि सर्वोच्च अदालत ने ‘इच्छा मृत्यु’ की इजाजत दे दी है | सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच […]

“कोई भी राज्य नहीं लगा सकता ‘पद्मावत’ की रिलीज़ पर प्रतिबंध”: सुप्रीम कोर्ट

आज सुप्रीम कोर्ट ने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ की रिलीज़ पर कई राज्यों में लगे प्रतिबंध के खिलाफ फ़िल्म के निर्माताओं द्वारा याचिका पर सुनवाई करते हुए अपना फ़ैसला सुनाया। इस फ़ैसले के तहत सुप्रीम कोर्ट ने मध्‍य प्रदेश, हरियाणा, राजस्‍थान और गुजरात द्वारा अपने-अपने राज्‍यों में इस फिल्‍म की रिलीज पर लगाए गए प्रतिबंध […]

“खाप पंचायतों को बैन करे केंद्र सरकार, वरना हमें देना पड़ेगा दख़ल”: सुप्रीम कोर्ट

खाप पंचायतों के मनमाने और ग़ैरकानूनी फ़ैसलों के किस्से हमनें कई बार सुने हैं और इसका विरोध कोई आज की बात नहीं है | पहले भी सुप्रीम कोर्ट समस्त कई संगठन, सरकारों से इसको बैन करने की गुजारिश कर चुकें हैं | लेकिन आज खाप पंचायतों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार […]

देश के इतिहास में पहली बार ‘सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों’ ने ‘चीफ जस्टिस’ पर लगाए गंभीर आरोप

आज का दिन देश के इतिहास में अवश्य ही दर्ज़ होगा, आज पहली बार ऐसा हुआ है जब सुप्रीम कोर्ट के कुछ वरिष्ठ न्यायधीश मीडिया के सामने आए और उन्होंने मुख्य न्यायधीश पर गंभीर आरोप लगाए | दरसल आज सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायधीशों, जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस […]

सुप्रीम कोर्ट की उत्तर प्रदेश सरकार को फ़टकार, क्या आधार कार्ड न रखने वाले बेघर सरकार के लिये अस्तित्व में नहीं?

बीते कुछ समय में देश की सर्वोच्च अदालत जनहित की दृष्टि से अनेकों फ़ैसले लेने के साथ ही, सरकारों के सामने कई गंभीर प्रश्नों को भी उठा कर उनसे इन पर जवाब माँगती नज़र आई है। भले ही सुप्रीम कोर्ट का यह कदम जनहित से जुड़े अनेकों मुद्दों पर सरकारों की विफ़ल कार्यप्रणाली को दर्शता […]