July 23, 2018
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‘मजबूर हालातों’ से ‘मशहूर होने के सफ़ल इरादों’ तक के सफ़र का नाम: ज़ाकिर खान

  • by Ashutosh
  • February 17, 2018

बाकी सब का तो पता नहीं, लेकिन देश में युवाओं के बीच आज ‘ज़ाकिर खान’ का नाम किसी परिचय का मोहताज़ नहीं है, और मैं भी यहाँ इस शख्सियत का कोई जीवन परिचय नहीं बताने वाला हूँ | बस इतना बता दूँ, इंदौर की मिट्टी में पैदा हुए ज़ाकिर ने हमारी आपकी ही तरह या शायद उससे भी ज्यादा, ज़िन्दगी की तमाम चुनौतियों को झेलते हुए आज ये मुकाम हासिल किया है |

यूँ तो हम सब इनकी कविताओं, शायरी और ख़ासतौर पर इनके ख़ास अंदाज़ को लेकर इनके कायल हैं | लेकिन कभी सोचा है, आख़िर क्या जादू है इनकी बातों का जो आपको ख़ुद से जोड़ लेती है?

दरसल, ज़ाकिर की सबसे बड़ी ख़ासियत ही यही है कि वह बहुत ख़ास बनने की कोशिश नहीं करते | व्यक्तिव में सादगी, चेहरे पर हँसी और पंक्तियों में सभी के दिलों को छू जाने वाला दर्द, ऐसा ही होता है माहौल जब ज़ाकिर हाथ में माइक लिए लोगों के बीच किसी महफ़िल में अपनी बातें बाँट रहे होतें हैं | 

जब भी सामने कोई मशहूर शख्सियत कुछ इस ढ़ंग से अपनी बातें साझा करे कि उसकी हर एक बात, हर अंदाज़ और हर एक लाइनों से आपकी जुबान पर हँसी और दिल में ख़ुद के साथ बीतें ऐसे ही लम्हों की तलाश अपने आप शुरू हो जाए, तो समझ लीजिये आप ज़ाकिर खान की सजाई हुई महफ़िल में बैठे हैं |

दिल के टूटने की नज़्म हो, या संघर्ष भरे दौर की यादों का दोहराने वाली लाइनें, आप इनकी हर पंक्तियों में एक ऐसा सादगी भरा तेवर पायाएंगें, जो हमेशा यह दर्शाते नज़र आयेंगें कि

‘हालत कितने भी मजबूर हो जाए, लेकिन ज़ाकिर के मशहूर होने के इरादों को न रोक पाए’

ज़ाकिर की हर नज़्म आपको यह एहसास दिलाती है कि यह पंक्ति उनकी कल्पना से पहले कहीं न कहीं उनकी हकीकत भी रह चुकी है, और शायद इसलिए हम उनके उन तजुर्बों में खो से जातें हैं, क्यूंकि वो तजुर्बे कोई असाधारण से नहीं, बल्कि आम से होतें हैं | इतने आम की आप उनसें ख़ुद को जोड़ पाए, इतने आम जो आपके भी पुराने दर्द और संघर्षों को छु लें | बस ज़ाकिर के उन आम लम्हों में एक बात सबसे ख़ास और अलग होती है, और वह है ज़ाकिर का उन लम्हों को हमसें बाँटने का अंदाज़, क्यूंकि ज़ाकिर का आगाज़ भले कैसे भी रंग में लिपटा हो, लेकिन उसका अंजाम  हमेशा मुस्कान के रंग में लिपटा नज़र आता है |

इन बातों को दर्शाती ज़ाकिर की ही कुछ पंक्तियाँ हैं,

” कामयाबी तेरे लिए हमनें ख़ुद को यूँ तैयार कर लिया,

अपने ज़ज्बातों को बाज़ार में नीलाम कर लिया “

अब ज्यादा तो कुछ नहीं कहूँगा, क्यूंकि ज़ाकिर के बारे में ज़ाकिर से बेहतर कोई बयाँ नहीं कर सकता, तो आइये सुनते हैं उनका सफ़र उनकी ही ज़ुबानी,

 

 

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